ईद के दिन कही घर से बाहर ना निकलना,
लोग चान्द समझके कही रोजा ना तोड दे,
खफा हो कर खुदा कही...
चान्द जैसे मुखडे बनाना ना छोड दे...
काव्यरस
| लेखनविषय: |
|---|
वाचने
3124
प्रतिक्रिया
18
मिसळपाव
प्रतिक्रिया
आमचा पण एक गावठी बाण....
=))=))
दो बाण और....
पैजारबुवा, इर्षाद!=))
In reply to दो बाण और.... by ज्ञानोबाचे पैजार
लगे रहो पैजारबुवा
वो मेरेकु बोल्या इद के दिन
वहा वा... वहा वा....
In reply to वो मेरेकु बोल्या इद के दिन by प्राची अश्विनी
सीने में जलन
In reply to वहा वा... वहा वा.... by ज्ञानोबाचे पैजार
एक तुफानी लेहर को पै तुम अ
In reply to सीने में जलन by पैसा
लेहर
In reply to एक तुफानी लेहर को पै तुम अ by प्राची अश्विनी
एकदम दणदणीत शायरया आहेत
In reply to लेहर by पैसा
वहा वा... वहा वा....
In reply to वहा वा... वहा वा.... by ज्ञानोबाचे पैजार
पन्त काय म्हन्त्ता कसा वाटला मिपा मुशायरा
हुस्न कि क्या तारीफ करू आपकी .........
युं शायरी को ऐसे मत फेको
अरारारारा , विजूबौ. लैच हो.
In reply to युं शायरी को ऐसे मत फेको by विजुभाऊ
आज कल पाव जमीं पर नहीं पडते
हे..हे..हे..हे
In reply to आज कल पाव जमीं पर नहीं पडते by आदूबाळ