Skip to main content
मिसळपाव

Main navigation

  • मुख्य पान
  • पाककृती
  • कविता
  • भटकंती
  • नवीन लेखन
Submitted by अरुण मनोहर on Fri, 03/04/2011 - 09:19
गडाफी आता असे म्हणत असेल का? मुन्ना बदनाम हुआ सॅम अंकल तेरे लिये (३ बार) मुन्ने का क्रूड नशीला, गॅस सुनहरा, करम फ़ुटेला रे क्रुड का बाम्ब हुआ, सॅम अंकल तेरे लिये मुन्ना बदनाम हुआ सॅम अंकल तेरे लिये मुन्ने का क्रूड नशीला, गॅस सुनहरा, करम फ़ुटेला रे क्रुड का बाम्ब हुआ, सॅम अंकल तेरे लिये (२ बार) मुन्ना बदनाम हुआ सॅम अंकल तेरे लिये (२ बार) सद्दाम को काटा, हुस्नी को पिटा, हुस्नी को पिटा सद्दाम को काटा, हुस्नी को पिटा, हुस्नी को पिटा है तेरे साजीश में व्हिलनी अदा रे व्हिलनी अदा हाय तुने लादीन को हव्वा बनाने मे हाय तुने लादीन को हव्वा बनाने लाखो डालर दिया लेकीन मुझको मरवाया, डारलिंग तेरे लिये मेरा बज़ार उठवाया, डार्लिंग तेरे लिये मुन्ना बदनाम हुआ सॅम अंकल तेरे लिये (२ बार) _________________________ ओ मुन्ना रे ओ मुन्ना रे _________________________तेरा पर्चे पर्चे, चर्चा रे _________________________.......मो टर का बढाया बढाया खर्चा रे _________________________ .......मो टर का बढाया तुने खर्चा रे _________________________ओ मुन्ना रे.. कैसे भिखारी से पाला पडा जी पाला पडा हो कैसे भिखारी से पाला पडा जी पाला पडा सस्ता दे सस्ता दे पिछे पडा मेरे पिछे पडा हलकट ना जाने मेरे नलकेके आगे __________________________(हाय हाय मार डालेंगा क्यां) हलकट ना जाने मेरे नलकेके आगे हाये कायनाथ झुका अब तक खुदको लुटाया, डारलिंग तेरे लिये सस्ते में खूब बेचा डारलिंग तेरे लिये मुन्ना बदनाम हुआ, सॅम अंकल तेरे लिये.... ________________________ है तुझ में पुरी ताकद का नशा, ताकद का नशा _ _______________________है तुझ में पुरी ताकद का नशा, ताकद का नशा ________________________कर दे अमीर मुझको, कर्जा चुका मेरा कर्जा चुका ________________________खर्बो के कर्जे मेरे खर्चे है भारी, हो ________________________खर्बो के कर्जे मेरे खर्चे है भारी तू थोडा दिला ________________________ तू आयटम खास मिला, डारलिंग मेरे लिये ________________________मुन्ना बदनाम हुआ डारलिंग मेरे लिये (२ बार) मुन्ने का क्रूड नशीला, गॅस सुनहरा, करम फ़ुटेला रे क्रुड का बाम्ब हुआ, सॅम अंकल तेरे लिये मुन्ना बदनाम हुआ सॅम अंकल तेरे लिये जिक्रें आवाम हुआ, सॅम अंकल तेरे लिये तानाशाह मुझे बुलाया, सॅम अंकल तेरे लिये ________________________छलिया से रांड बनाया, डारलिंग मेरे लिये ________________________कृड का बाम्ब बनाया, डारलिंग मेरे लिये दुनिया में झोल हुआ, तेरे तेरे तेरे लिये हाले बदनाम हुआ, सॅम अंकल तेरे लिये ले सरे आम हुआ, सॅम अंकल तेरे लिये सॅम अंकल तेरे लिये, सॅम अंकल तेरे लिये, सॅम अंकल तेरे लिये

Submitted by नरेशकुमार on Fri, 03/04/2011 - 09:34

Permalink

झॅक आहे इडंबण.. सद्य

झॅक आहे इडंबण.. सद्य परिस्थीति लचकत मुरडत नाचत डॉल्यापुढे आली.
  • Log in or register to post comments

Submitted by पियुशा on Fri, 03/04/2011 - 10:01

Permalink

मस्त ,लय आवडलि

मस्त ,लय आवडलि :)
  • Log in or register to post comments

Submitted by गणेशा on Fri, 03/04/2011 - 11:29

Permalink

मस्त

मस्त
  • Log in or register to post comments

Submitted by टारझन on Fri, 03/04/2011 - 11:44

Permalink

झणझणीत अंजन !! व्वा -

झणझणीत अंजन !! व्वा ;) - मुन्नाभाई बिडीएसएम
  • Log in or register to post comments

Submitted by स्पंदना on Fri, 03/04/2011 - 11:46

Permalink

एकदम खर! त्यातच भर

एकदम खर! त्यातच भर घालाना किधर तो आग लगेगा, युद्ध फटेगा, डार्लींग मेरे लिये कोइ तो शस्त्र खरिदेगा, पैसा देगा, डार्लींग मेरे लिये फिर इकॉनॉमी चलेगा,डॉलर उठेगा, डार्लींग मेरे लिये, हा बास्टर्ड तेरे लिये.
  • Log in or register to post comments

Submitted by llपुण्याचे पेशवेll on Fri, 03/04/2011 - 12:02

Permalink

झांटामाटीक विडंबन झाले आहे.

झांटामाटीक विडंबन झाले आहे.
  • Log in or register to post comments

Submitted by नगरीनिरंजन on Fri, 03/04/2011 - 12:07

Permalink

दबंग विडंबन!

दबंग विडंबन!
  • Log in or register to post comments

Submitted by कच्ची कैरी on Fri, 03/04/2011 - 16:10

Permalink

गैर मस्त

गैरच पटण बर का !आखो येउ द्या :)
  • Log in or register to post comments

Submitted by अवलिया on Fri, 03/04/2011 - 18:37

Permalink

मस्त !

मस्त !
  • Log in or register to post comments

Submitted by सहज on Fri, 03/04/2011 - 18:54

Permalink

हा हा

झकास!
  • Log in or register to post comments

Submitted by विजुभाऊ on Sat, 03/05/2011 - 02:01

Permalink

चालूद्या. मराठी भाषेची निदान

चालूद्या. मराठी भाषेची निदान एकतरी ओळ असू द्यात
  • Log in or register to post comments

Submitted by अरुण मनोहर on Sat, 03/05/2011 - 02:56

In reply to चालूद्या. मराठी भाषेची निदान by विजुभाऊ

Permalink

भौ, पयलीच लाईन मर्हाटीत हाये

भौ, पयलीच लाईन मर्हाटीत हाये ना गा! अगदी बोल्डात लिवलीय. जरा नीट पाह्यजो!
  • Log in or register to post comments

Submitted by अविनाशकुलकर्णी on Sat, 03/05/2011 - 12:37

Permalink

मस्त.... मनमोहन सिंग गाण्यावर

मस्त.... मनमोहन सिंग गाण्यावर भंगडा करीत असल्याचे द्रुश्य डोळ्या समोर तरंगले.
  • Log in or register to post comments
  • Log in or register to post comments
  • 3065 views

प्रवेश करा

  • नवीन खाते बनवा
  • Reset your password

© 2026 Misalpav.com