आयटम ऐवजी मग "छावी" कसे वाटेल? तो पण नाही आवडला तर मग तुम्हीच एखादा अनचीप शब्द सुचवा ना...
इश्वराचे स्मरण झाले की तुझाच चेहरा डोळ्यासमोर येतो,
तो चराचरात वसला आहे आणि तू मनाच्या गाभार्यात,
बघा हे थोडे अनचीप करायचा प्रयत्न केला आहे.
तुमच्या साठी कायपण डीबी अंकल,
काल पण
आज पण
अन उद्या पण,
परवा मात्र माझा विकली ऑफ आहे.
पैजारबुवा,
खुद को इतना भी मत बचाया कर,
बारिशें हो तो भीग जाया कर
चाँद लाकर कोई नहीं देगा,
अपने चेहरे से जगमगाया कर
दर्द हीरा है, दर्द मोती है,
दर्द आँखों से मत बहाया कर
काम ले कुछ हसीन होंठो से,
बातों-बातों में मुस्कुराया कर
धूप मायूस लौट जाती है,
छत पे किसी बहाने आया कर
कौन कहता है दिल मिलाने को,
कम से कम हाथ तो मिलाया कर
-- बशीर बद्र
जहाँ जहाँ बुने थे सपने
ऊस जगह को खरीद लिया
अब इंतजार है तो बस
आखरी सासतक शीशमहल बना दु
ताजमहल बना देता गर तू और कि ना होती
शिशें कि तरह तोड दिया दिल जालीम
गैरोने सपने खरीद लिये
चंद लब्जो में हंम भी बयाँ कर सकते थे
पर हमने शायरी का ऐब रखा
बात भलेही छोटी क्यू ना हो
ऐ गालिब , हमने सीधा रास्ता मोड लिया
वोह तुफान हि क्या काम का
जिसमे कश्ती ना डुबे
हंम तो यूही बदनाम ठहरे
ये तो आपकी नुमाइश है
जिसने हमें यह नाम दिया
बडी मुद्दत से मिला है दोस्त हमें
यारी खूब मनायेंगे
कबुल करना यह तोहफा हमारा
मिलके शायरी लीखेंगे II
तेरे आने पर सुझे हमें
लब्ज जो बयान हुए
ए दोस्त जिगर के तुकडे
'तेरी शायरी ने हमारे दिल लूट लिये
चंद मुलाखात में
आप गहरे हो गये
पहले सिर्फ मुलाकात होती थी
फिर हमने मिलने के बहाने ढुंढ लिये
यूह तो हम दोस्तोके साथ भी मुस्कुराया करते थे
आपके दिदार ने , जिने का रुख बदल दिया
काश हम भी सलीम के जमाने को महसूस करते
अनारकलीसे ना सही , हमी भी किसी को बेइन्तहा प्यार करते
यहा तो हरेक सलीम कई कालियोको लेके घुमता हुआ देखा है
वोह जमानाही कुछ और था , जिसमे तक्त झुकते हुए देखा है
मुझे फिर वहीं याद आने लगे है !
जिन्हे भुलनेमें जमाने लगे है !
ये कहना है उनसे मुहब्बत है मुझको !
ये कहने में उनसे जमाने लगे है !
हरिहरनच्या आवाजात कितीही वेळा ऐकलं तरी कमीच वाटतं :)
कातील हू काबिल नहीं मै
माशुका हमें फर्माती थी
अरसो गुजर गये उसे जातें
हम काबील बनने से रहे
हरेक माशुका बेवकूफ नजर आती है
जिसे दिल तोहफेमे पेश करें
ऐसी कोई शायद बनी हि नहीं
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
इति :- बशीर बद्र
दिल्लीत जो हिंसाचार झाला आहे त्यात अत्यंत क्रूर घटना समोर आलेली आहे, ती म्हणजे आयबी अधिकारी अंकित शर्मा यांची हत्या ! त्यांना अत्यंत क्रूरपणे ठार करण्यात आले असुन ४ तासात त्यांना ४०० वेळा भोसकले गेले होते ! :( अशी क्रूरता करणार्या हैवानांना आयबीवाल्यांनी शोधले पाहिजे आणि त्यांना उभे सोलुन काढले पाहिजे !
नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की,
पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की.
..
तुम तरकीब निकालते हो दिल जलाने की,
हम तरकीब निकालते है तुम्हे मनाने की.
अरेरे...
सॉरी डी बी अंकल
चालू द्या.
अर्ज है की...
वा डी बी अंकल वा..
वा वा
एक गजल
मस्तच !
अतहर नफ़ीसचा शेर आहे...
अजुन एक
अजुन येकावर येक
चंद मुलाखात में
मैने तेरे साथ देखा था तेरे
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के
मस्त ! एव्हरग्रीन !
किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल
ना बाग कि मशक्कत होती
भारी
मेरी ताकदीर में एक भी गम ना
ह्याव अ गुड्डे..!
उबैदुल्लाह अलीम म्हणतो....
अजुन एक
छान ! पण पंचला थोडा
किती उशीर
मुझे फिर वहीं याद आने लगे है
+१
+१
अजुन येक
आज मराठी भाषादिना निमित्त :
अहाहा
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने
मदनबाण.....
आजची स्वाक्षरी :- मराठमोळ्या माधुरी कानिटकर देशाच्या तिसऱ्या महिला लेफ्टनंट+१
+१
निषेध करावा तेवढा थोडाच आहेचोख ताळेबंद कबरी अन चितांचा
क्लास.
मुन्वर रानाचा शेर अर्ज है.
वाह, डॉ साहेब ! क्या बात है,
कुठेय गं तू...!!
नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस
नाराज़गी नहीं है कोई … मै
तुझा सांग ना रंग ...?
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर
सद्यस्थितीवर...अजहर नकवीचा शेर.
वाह, बढीया !
शायर बन न पाये हम
शायर बन न पाये हम
उडा देती है नींदे
सही.
वाह, मस्तच !
ले चला जान मेरी रूठ के जाना
अर्ज है.,.
क्या बात… क्या बात…
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