Skip to main content
लेखक तृप्ति २३ यांनी शनिवार, 28/12/2019 16:01 या दिवशी प्रकाशित केले.
Whatsapp Romantic Shayari
खामोश दिल हमारा सब कुछ सह लेता है…. तेरी याद मे शायद ये दिल युही रोये जाता है…
Whatsapp Romantic Shayari https://www.truptisshayari.com/whatsapp-romantic-shayari
काव्यरस

वाचने 68336
प्रतिक्रिया 115

प्रतिक्रिया

शहर गुम-सुम रास्ते सुनसान घर ख़ामोश हैं क्या बला उतरी है क्यूँ दीवार-ओ-दर ख़ामोश हैं -दिलीप बिरुटे

In reply to by प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे

वाह, बढीया ! आज अक्षरशः यातला शब्दनशब्द अनुभवला !

शायर बन न पाये हम की मुहोब्बत मे दिल न टूटा हमारा! एक कसक सी रह गयी दिल मे जिनसे की मुहोब्बत शादी उन्हीसे हो गई!

शायर बन न पाये हम की मुहोब्बत मे दिल न टूटा हमारा! एक कसक सी रह गयी दिल मे जिनसे की मुहोब्बत शादी उन्हीसे हो गई!

मुझे मालूम नहीं मेरी आखों को तलाश किसकी है, तुझे देखता हूँ तो मंजिल का एहसास होता है। - दिलीप बिरुटे

In reply to by टर्मीनेटर

मस्त होता. अर्ज है...लकी फारुकी हसरतचा शेर आहे. अपने कानों में पहन ले मेरे दिल की धड़कन मैं तिरे वास्ते लाया हूँ ले झुमका दिल का -दिलीप बिरुटे

दौर काग़ज़ी था- देर तक ख़तों में जज़्बात महफ़ूज़ रहते थे, मशीनी दौर है- ऊँगली से मिटा दी जाती हैं उम्र भर की यादें

याद करोगे तो याद रहोगे, क्योंकि हमारी भी याददाश्त बहुत कम है. -दिलीप बिरुटे

यहाॅ हर मर्ज की दवा है और हर उदासी का सबब किसम किसम के बंदे है कहते है, मिपा ऐसी जगह है जहाॅ मुर्दे भी जींदा होते है -लखनपुरीया बाकी के बादमे.....

In reply to by कर्नलतपस्वी

मिपा ऐसी जगह है जहाॅ मुर्दे भी जींदा होते है
जिंदगी जिते हैं 'जिंदादिल'... 'मुर्दादिल' क्या खांक जिया करते हैं... (- टर्मीनेटर मिपावाला)

मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा... सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए... -कृष्ण बिहारी नूर

धागा चालू राहायला पाहिजे.. आदरणीय गुलजार: मुझको इतने से काम पे रख लो... जब भी सीने पे झूलता लॉकेट उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से सीधा करता रहूँ उसको मुझको इतने से काम पे रख लो... जब भी आवेज़ा उलझे बालों में मुस्कुराके बस इतना सा कह दो आह चुभता है ये अलग कर दो मुझको इतने से काम पे रख लो.... जब ग़रारे में पाँव फँस जाए या दुपट्टा किवाड़ में अटके एक नज़र देख लो तो काफ़ी है मुझको इतने से काम पे रख लो...

मेरी आँखों ने वो मंज़र भी देखा है हमदर्दों को ही बेरहम होते देखा है ।। महफ़िलो में जिनको रहम दिल देखा है अंधेरो में उनको ही खंज़र चलाते देखा है ।।

मुर्दो के शहरमें,शमशान का पता बतायें कौन? ठंडी,चलती फिरती लाशोंको जगाये कौन? सब अपने अपने गठ्ठर ढो रहे है, मेरे गठ्ठर को हात लगाये कौन? ll एक और.... फाग का महिना है, तपिश बढ रही है गला सुख रहा है,पानी तो पिला दे ए साकी समय नही हुआ,अब भी होरी को चंद दिन बाकी है ll -लखनपुरीया