पडघम- २०१४ भाग १: राज्य विधानसभा आणि लोकसभा निवडणुकांमधील मतदानामधील फरक
राज्य विधानसभा आणि लोकसभा निवडणुकांमधील मतदानामधील फरक या लेखाने पडघम-२०१४ या लेखमालेची सुरवात करत आहे. या लेखमालेसाठी १९८९ पासून सर्व निवडणुकांच्या आकडेवारीचा उपयोग करणार आहे. ही आकडेवारी जमा करायला मी सुरवात केली होती गेल्या वर्षीपासून.गेल्या २-३ महिन्यात ज्ञानोबाचे पैजार, पैसाताई, राहुलजीव्ही, सुहासदवन आणि श्रीरंग जोशी यांनी ही आकडेवारी एकत्र करायला महत्वाची मदत केली. या मिपाकरांच्या मदतीमुळेच ही लेखमाला पूर्ण होणार आहे त्यामुळे त्यांचे सर्वप्रथम आभार मानून या लेखमालेला सुरवात करतो.
या भागात लोकसभा आणि विधानसभा निवडणुकांमध्ये मतदानात फरक असतो का या प्रश्नाचे उत्तर शोधू. माझा दावा आहे की प्रादेशिक पक्ष आणि छोटे पक्ष/अपक्ष हे विधानसभा निवडणुकांमध्ये जितकी चांगली कामगिरी करतात तितकी चांगली कामगिरी लोकसभा निवडणुकांमध्ये करत नाहीत. त्याचप्रमाणे राष्ट्रीय पक्ष विधानसभा निवडणुकांपेक्षा लोकसभा निवडणुकांमध्ये अधिक चांगली कामगिरी करतात. इथे राष्ट्रीय पक्ष विरूध्द प्रादेशिक पक्ष अशी तुलना केली जात नसून नसून पुढे दिल्याप्रमाणे दोन तुलना केल्या जात आहेत:
१. राष्ट्रीय पक्षांची लोकसभा निवडणुकांमधील कामगिरी विरूध्द राष्ट्रीय पक्षांची विधानसभा निवडणुकांमधील कामगिरी
२. प्रादेशिक पक्षांची लोकसभा निवडणुकांमधील कामगिरी विरूध्द प्रादेशिक पक्षांची लोकसभा निवडणुकांमधील कामगिरी
अनेकदा असे वाटते की विधानसभा निवडणुका झाल्यानंतर एका वर्षाच्या आत लगेचच लोकसभा निवडणुका झाल्या तर सर्वसाधारणपणे लोकसभेत लागलेलेच निकाल परत लागतील. ढोबळ मानाने हा निष्कर्ष बरोबर आहे.पण मतांच्या टक्केवारीकडे बघितले तर या ढोबळ मानाने उभ्या राहिलेल्या चित्रापेक्षा आपल्याला आणखी काही गोष्टी कळतील.त्या गोष्टी कोणत्या हे बघण्यापूर्वी आपण तो विदा बघू.
खाली दिलेल्या तक्त्यांमध्ये लोकसभा निवडणुका झाल्यानंतर दोन वर्षात आत विधानसभा निवडणुका झाल्या अशी काही राज्ये (गेल्या २० वर्षातील) निवडली आहेत.खाली दिलेल्या तक्त्यामध्ये पुढील माहिती दिली आहे:
१. विधानसभा मते% : विधानसभा निवडणुकांमध्ये विविध पक्षांना मिळालेली मते
२. लोकसभा मते%: लोकसभा निवडणुकांमध्ये विविध पक्षांना मिळालेली मते
३. मतांमधील फरक: लोकसभा निवडणुकांमध्ये विधानसभा निवडणुकांच्या तुलनेत किती जास्त मते मिळाली
४. विधानसभा जागा विजय: विधानसभा निवडणुकांमध्ये विविध पक्षांनी जिंकलेल्या जागा
५. विधानसभा मतदारसंघ आघाडी: लोकसभा निवडणुकांमध्ये विविध पक्षांनी किती विधानसभा मतदारसंघांमध्ये आघाडी मिळवली
६. जागांमधील फरकः विधानसभा निवडणुकांच्या तुलनेत लोकसभा निवडणुकांमध्ये विविध पक्षांनी किती जास्त जागांमध्ये आघाडी मिळवली
यातून आपल्याला पुढील गोष्टी दिसतील:
१. विधानसभा निवडणुकांच्या तुलनेत लोकसभा निवडणुकांमध्ये प्रादेशिक पक्ष/लहान पक्ष आणि अपक्ष यांच्याकडील मते राष्ट्रीय पक्षांकडे जातात हे स्पष्टपणे आपल्याला दिसते. हा कल अगदी उत्तर प्रदेशसारख्या राज्यातही (दोन मुख्य राष्ट्रीय पक्षांमध्ये स्पर्धा नसलेल्या राज्यातही) दिसतो.
आता प्रश्न हा की प्रादेशिक पक्ष/अपक्ष यांची कमी झालेली मते नक्की कोणत्या राष्ट्रीय पक्षाला जातात.
२. सर्वसाधारणपणे विधानसभा निवडणुकीमध्ये लागलेला कल लोकसभेमध्ये कायम राहतो.पण विधानसभेमध्ये विजयी झालेल्या पक्षाला विधानसभेत पराभूत झालेल्या पक्षापेक्षा अधिक मते आपल्याकडे खेचता येतात. उदाहरणार्थ राजस्थानात डिसेंबर २००८ मध्ये कॉंग्रेस पक्ष विधानसभा निवडणुका जिंकला.पण २००९ च्या लोकसभा निवडणुकांमध्ये कॉंग्रेसला आपल्याकडे १०.४% मते तर भाजपला केवळ २.३% मते आपल्याकडे खेचता आली.यातून परिणाम काय झाला? तर लोकसभा निवडणुकांमध्ये कॉंग्रेसने २५ पैकी २० जागा जिंकल्या तर भाजपने अवघ्या ४. चारच महिन्यांपूर्वी झालेल्या विधानसभा निवडणुकांमध्ये भाजपची इतकी वाईट अवस्था झाली नव्हती. पण लोकसभेत अशी वाईट अवस्था झाली याचे कारण अपक्ष/लहान पक्ष यांच्याकडून कॉंग्रेसने भाजपपेक्षा आपल्याकडे बरीच जास्त मते खेचून आणली होती. असेच इतर राज्यांविषयीही लिहिता येईल.
छत्तिसगडमध्ये २००८-०९ या काळात अपक्ष आणि इतर यांची मते वाढलेली दिसत आहेत.याचे कारण आहे. दुर्ग लोकसभा मतदारसंघातून ताराचंद साहू यांनी बंड करून भाजप उमेदवाराविरूध्द निवडणुक लढवली (ताराचंद साहू २००४ मध्ये दुर्ग मधून लोकसभेवर निवडून गेले होते.पण त्यांचे पक्षनेतृत्वाबरोबर मतभेद झाले). त्यांना २ लाख ६१ हजार ८७९ मते मिळाली तर राज्यात एकूण मिळालेली मते होती ८५ लाख ५२ हजार ५४१. तेव्हा एकट्या ताराचंद साहू यांनी राज्यातील एकूण मतदानापैकी ३.१% मते मिळवली.छोट्या राज्यांमध्ये असा एखादा तगडा अपक्ष उमेदवार अशा प्रकारचा परिणाम घडवू शकतो. जेव्हा विधानसभा आणि लोकसभा निवडणुकांमध्ये थोडा अधिक फरक असतो तेव्हा या कलाच्या थोडा वेगळा कल बघायला मिळू शकतो (उदाहरणार्थ हिमाचल प्रदेश-२००७ ते २००९, गुजरात २००७ ते २००९).
कारणे
पण प्रादेशिक/छोटे पक्ष आणि अपक्ष हे विधानसभेत जितकी चांगली कामगिरी करतात तितकी चांगली कामगिरी लोकसभा निवडणुकांमध्ये करत नाहीत असे का होत असावे याविषयीचे माझे मत व्यक्त करून पहिल्या लेखाची सांगता करतो. याविषयी माझ्या मते दोन कारणे आहेत.
१. विधानसभा निवडणुकांसाठी मतदार राज्य पातळीवरच्या मुद्द्यांचा विचार करतात तर लोकसभा निवडणुकांसाठी देश पातळीवरच्या मुद्द्यांचा. देशपातळीवरील मुद्द्यांसाठी राष्ट्रीय पक्ष अधिक लोकांना अधिक योग्य वाटतात तर राज्यपातळीवरील मुद्द्यांसाठी प्रादेशिक पक्ष अधिक लोकांना अधिक योग्य दिसतात.
२. लोकांना विजयी व्हायची शक्यता कमी असलेल्या उमेदवाराला मत देऊन आपले मत फुकट घालवायचे नसते.एक कल्पना करू की आपण दहा इमारती असलेल्या एका कॉम्प्लेक्समध्ये राहत आहोत आणि आपल्या इमारतीतला एक रहिवासी कॉंम्प्लेक्सच्या संचालक मंडळाच्या अध्यक्षपदासाठीच्या निवडणुकीसाठी उभा राहिला.या परिस्थितीत ’आपला’ उमेदवार निवडून यायची शक्यता आहे म्हणून मी माझे मत माझ्या इमारतीमधील उमेदवाराला देईन. पण समजा तोच रहिवासी महापालिकेच्या निवडणुकीला उभा राहिला तर तो निवडून यायची शक्यता बरीच कमी होईल.तेव्हा शक्यतो मला माझे मत फुकट घालवायला आवडणार नाही.तेव्हा मी कदाचित माझे मत दुसऱ्या उमेदवाराला देईन.समजा तोच उमेदवार विधानसभा किंवा लोकसभेला उभा राहिला तर तो उमेदवार निवडून यायची शक्यता आणखी कमी होईल त्यामुळे त्या उमेदवाराचे अगदी कट्टर समर्थक वगळता इतर लोक त्या उमेदवाराला मत देणार नाहीत.
राष्ट्रीय पक्षांची लोकसभा निवडणुकीत आणि पविधानसभा/लहान पक्षांची/अपक्षांची विधानसभा निवडणुकीत अधिक चांगली कामगिरी हा कल बघायला मिळाला आहे.जर कोणा मिपाकराला इतर राज्यांविषयीचा विदा हवा असेल तर प्रतिसादांमध्ये जरूर लिहावे.तो मी तिथेच देईन.
लेखमालेच्या दुसर्या भागात लोकसभा निवडणुका झाल्यानंतर विधानसभा निवडणुका झाल्यास परिस्थिती कशी बदलते हे बघू.
| मध्य प्रदेश | २००८-०९ | |||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ३७.६% | ४३.४% | ५.८% | १४३ | १२२ | -२१ |
| कॉंग्रेस | ३२.४% | ४०.१% | ७.७% | ७१ | १०० | २९ |
| बसप | ९.०% | ५.९% | -३.१% | ७ | ७ | ० |
| अपक्ष आणि इतर | २१.०% | १०.६% | -१०.४% | ९ | १ | -८ |
| राजस्थान | २००८-०९ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ३४.३% | ३६.६% | २.३% | ७८ | ४२ | -३६ |
| कॉंग्रेस | ३६.८% | ४७.२% | १०.४% | ९६ | १४४ | ४८ |
| बसप | ७.६% | ३.४% | -४.२% | ६ | ० | -६ |
| अपक्ष आणि इतर | २१.३% | १२.८% | -८.५% | २० | १४ | -६ |
| दिल्ली | २००८-०९ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ३६.३% | ३५.२% | -१.१% | २३ | २ | -२१ |
| कॉंग्रेस | ४०.३% | ५७.१% | १६.८% | ४३ | ६८ | २५ |
| बसप | १४.०% | ५.३% | -८.७% | २ | ० | -२ |
| अपक्ष आणि इतर | ९.४% | २.४% | -७.०% | २ | ० | -२ |
| छत्तिसगड | २००८-०९ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ४०.३% | ४५.०% | ४.७% | ५० | ६० | १० |
| कॉंग्रेस | ३८.६% | ३३.७% | -४.९% | ३८ | २३ | -१५ |
| बसप | ६.१% | ४.३% | -१.८% | २ | १ | -१ |
| अपक्ष आणि इतर | १५.०% | १७.०% | २.०% | ० | ६ | ६ |
| मध्य प्रदेश | २००३-०४ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ४२.५% | ४८.१% | ५.६% | १७३ | १८७ | १४ |
| कॉंग्रेस | ३१.६% | ३४.१% | २.५% | ३८ | ३८ | ० |
| बसप | ७.३% | ४.८% | -२.५% | २ | २ | ० |
| अपक्ष आणि इतर | १८.६% | १३.०% | -५.६% | १७ | ३ | -१४ |
| राजस्थान | २००३-०४ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ३९.२% | ४९.०% | ९.८% | १२० | १४० | २० |
| कॉंग्रेस | ३५.६% | ४१.५% | ५.९% | ५६ | ५८ | २ |
| बसप | ४.०% | ३.२% | -०.८% | २ | ० | -२ |
| अपक्ष आणि इतर | २१.२% | ६.३% | -१४.९% | २२ | २ | -२० |
| दिल्ली | २००३-०४ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ३५.२% | ४०.७% | ५.५% | २० | १४ | -६ |
| कॉंग्रेस | ४८.१% | ५४.८% | ६.७% | ४७ | ५६ | ९ |
| बसप | ५.८% | २.५% | -३.३% | २ | ० | -२ |
| अपक्ष आणि इतर | १०.९% | २.०% | -८.९% | १ | ० | -१ |
| छतिसगड | २००३-०४ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ३९.३% | ४७.८% | ८.५% | ५० | ७३ | २३ |
| कॉंग्रेस | ३६.७% | ४०.२% | ३.५% | ३७ | १७ | -२० |
| बसप | ४.४% | ४.५% | ०.१% | २ | ० | -२ |
| अपक्ष आणि इतर | १९.६% | ७.५% | -१२.१% | १ | ० | -१ |
| कर्नाटक | २००८-०९ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ३३.९% | ४१.६% | ७.७% | ११० | १४० | ३० |
| कॉंग्रेस | ३४.८% | ३७.६% | २.८% | ८० | ६२ | -१८ |
| जनता दल (ध) | १९.०% | १३.६% | -५.४% | २८ | २२ | -६ |
| अपक्ष आणि इतर | १२.३% | ७.२% | -५.१% | ६ | ० | -६ |
| हिमाचल प्रदेश | २००७-०९ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ४३.८% | ४९.६% | ५.८% | ४१ | ४८ | ७ |
| कॉंग्रेस | ३८.९% | ४५.६% | ६.७% | २३ | २० | -३ |
| अपक्ष आणि इतर | १७.३% | ४.८% | -१२.५% | ४ | ० | -४ |
| गुजरात | २००७-०९ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| भाजप | ४९.१% | ४६.५% | -२.६% | ११७ | १०५ | -१२ |
| कॉंग्रेस | ३८.०% | ४३.४% | ५.४% | ५९ | ७६ | १७ |
| अपक्ष आणि इतर | १२.९% | १०.१% | -२.८% | ६ | १ | -५ |
| कर्नाटक | १९९४-९६ | |||||
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | ||||
| जनता दल | ३३.५% | ३४.९% | १.४% | |||
| भाजप | १७.०% | २४.८% | ७.८% | |||
| कॉंग्रेस | २७.०% | ३०.३% | ३.३% | |||
| कर्नाटक कॉंग्रेस पक्ष | ७.३% | ३.१% | -४.२% | |||
| अपक्ष आणि इतर | १५.२% | ६.९% | -८.३% |
| उत्तर प्रदेश | २००७-०९ | |||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| विधानसभा मते% | लोकसभा मते% | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा विजय | विधानसभा मतदारसंघ आघाडी | जागांमधील फरक | |
| सप | २५.४% | २३.३% | -२.१% | ९७ | ११८ | २१ |
| बसप | ३०.४% | २७.४% | -३.०% | २०६ | १०० | -१०६ |
| भाजप | १७.०% | १७.५% | ०.५% | ५१ | ६२ | ११ |
| कॉंग्रेस | ८.६% | १८.३% | ९.७% | २२ | ९५ | ७३ |
| अपक्ष आणि इतर | १८.६% | १३.५% | -५.१% | २७ | ५० | २३ |
- पडघम २०१४- भाग २: क्रिटिकल मास
- पडघम २०१४- भाग ३: बॅटलग्राऊंड स्टेट- मध्य प्रदेश
- पडघम २०१४-भाग ४: बॅटलग्राऊंड स्टेट-कर्नाटक
- पडघम २०१४- भाग ५: बॅटलग्राऊंड स्टेट- राजस्थान
- पडघम २०१४- भाग ६: बॅटलग्राऊंड स्टेट- केरळ
- पडघम २०१४-भाग ७: बॅटलग्राऊंड स्टेट-महाराष्ट्र: मुंबई परिसर आणि कोकण
- पडघम २०१४-भाग ८: बॅटलग्राऊंड स्टेट-महाराष्ट्र (पश्चिम महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र, विदर्भ आणि मराठवाडा)
- पडघम २०१४-भाग ९: बॅटलग्राऊंड स्टेट-गुजरात
- पडघम २०१४-भाग १०: बॅटलग्राऊंड स्टेट-दिल्ली
- पडघम २०१४-भाग १२: बॅटलग्राऊंड स्टेट-पंजाब
- पडघम २०१४-भाग १३: बॅटलग्राऊंड स्टेट-उत्तराखंड
- पडघम २०१४-भाग १४: बॅटलग्राऊंड स्टेटस-उत्तर भारतातील इतर राज्ये
- पडघम २०१४-भाग १५: बॅटलग्राऊंड स्टेटस-पूर्व भारतातील राज्ये
- पडघम २०१४-भाग १६: बॅटलग्राऊंड स्टेटस-दक्षिण भारतातील इतर राज्ये
- पडघम २०१४-भाग १७: पूर्ण देशातील अंदाज
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वर्गीकरण
प्रतिक्रिया
सुंदर लेख
लोकसभा आणि विधानसभा निवडणुका एकत्र झाल्या तर
उत्तम लेख आणि विदा. सर्वच
कारण
छानच लेख !
प्रतिसाद
लोकसभेनंतर विधानसभेच्या निवडणुका झाल्यास
मस्तच!
कारणे
राहिलेले मुद्दे
नेहमी प्रमाणे
प्रतिसादाबद्दल धन्यवाद
चांगले संकलन व मांडणी.
हे तर खरेच आहे, आणि संयुक्तिक
शिवसेनेसारख्या आकाराने
हे झाले जागांचे.. पण
खरे आहे. हा तर्क टक्केवारीतील
अपक्ष-लहान पक्षांना मान्य करण्याजोगे
हो म्हणूनच लोकांना आपले मत
वा !
अपक्ष आणि इतर
खरं तर या निवडणुकीच्या
+१
प्रतिसाद
धन्यवाद ही लेखमाला चालु
चांगला लेख
निवडणूक खर्चातील फरक आणि अपक्षांची संख्या
आपले निरिक्षण
नमस्कार क्लिंटनजी
मुद्दे
क्लिंटन,
थोडा फरक
लहान तोंडी मोठा घास...
लेख प्रतिसाद वाचत आहे ,
काही निम्न आर्थिक स्तरातील
उत्तम चर्चा!
तरीही श्रीपाद नाईक यांची
डॉ. नातू
विनय नातू
>>> पडद्यामागे काहीतरी झाले
विश्लेषणाचा प्रयत्न आवडला.
मुद्दा
उत्तम
+ १ उत्तम....