जिंदगी ना मिलेगी दोबारा - जावेद अख्तर भावानुवाद
१.
एक बात होठों तक है जो आयी नहीं
बस आँखों से है झांकती
तुमसे कभी मुझसे कभी
कुछ लब्ज है वो मांगती
आवाज़ की बाहों में बाहे ड़ाल के इठलाये वो
लेकिन ये जो एक बात है
एहसास ही एहसास है
खुशबू सी है जैसे हवा में तैरती
खुशबू जो बेआवाज़ है
जिसका पता तुमको भी है जिसकी खबर मुझको भी है
दुनिया से भी छुपता नहीं
ये जाने कैसा राज़ है
भावानुवाद
एक कहाणी जी ओठांवर न येताही
डोकावे डोळ्यांच्या मधुनी
शब्दच काही मागत राही
तुझ्याजवळ अन माझ्याकडुनी...
कधी कहाणी आवाजाच्या
बाहूंमध्ये मिरवत असते
कधी कहाणी नुसती केवळ
जाणिव होउन भासत असते...
गंध जसा फिरतो वाऱ्यावर
मूकपणे दरवळतो घरभर
मूक कहाणी तुला समजते , मला
मिसळपाव