हातभर
वसकन वरड्या. गपचिप पड्या. फिर मुझे बोल्या " सट्या क्या रे?"
मै धडपडके ऊठ्या. खुडची पे बैठ्या. और ऊसकू बोल्या " खडा क्यों रे? बैठ ना"
"ये भोक तेरेके दिखता क्या रे?" आकबऱ्या छत को ईशारा करके बोल्या.
अब साला मै भी ऊठके ऊसे ढुंढने लगा. रामजाने कैसा भोक. लेकीन वो कहता है, तो देख तो लू.
"किधर रे किधर? मेरेको तो कुछ दिखता नै" मै मुंडी ऊपर घुमाके बारीक नजरसे देख्या.
"अैसा कैसा रे बावळट तू? वो ऊधर मेरे ऊंगलीके ऊपर देख. है क्या नै?"
मै ईधर से ऊधर गया, फिर ऊधर से भिताड के पास गया. आंखे फाड फाड के ऊपर देखा. पर ऊधर घंटा कुछ भी नही था. लेकीन आकबऱ्या बात मानके ही छोडेगा. यक नंबर की पोचेली चीज.
मिसळपाव