| काव्य |
शब्द मौनातले |
संदीप-लेले |
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...नवल! |
सत्यजित... |
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पुस्तक |
शिव कन्या |
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प्राक्तनाचे संदर्भ |
चंद्रकांत |
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आला पावसाळा आला पावसाळा |
पाषाणभेद |
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या वेड्याला न कसला लोभ , ना कुणाचा राग |
सिद्धेश्वर विल… |
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तुझा निरोप घेताना |
सिद्धेश्वर विल… |
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उध्दु . . तुला माह्यावर भरोसा नाय काय ? |
माम्लेदारचा पन्खा |
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ती पण आता पुसट वाटू लागलीय |
सिद्धेश्वर विल… |
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II शहराकडून "बा" चा फून आला II |
सिद्धेश्वर विल… |
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दिंडी |
अनन्त्_यात्री |
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परीक्षा |
माम्लेदारचा पन्खा |
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विंडोसीट |
फुंटी |
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झाली...पहाट झाली! |
सत्यजित... |
| काव्य |
मला आजवर कधीच रडू आलं नाही निपचित पडलेल्या कलेवरांच |
गरजू पाटिल. |
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मराठी माणसा झोपलाच राहा |
अरूण गंगाधर कोर्डे |
| काव्य |
(ए, बैठ ना जरासा) |
ज्ञानोबाचे पैजार |
| काव्य |
II नऊची ती बस खास होती II |
सिद्धेश्वर विल… |
| काव्य |
ये,बैस ना जराशी... |
सत्यजित... |
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भवताल |
चंद्रकांत |
| काव्य |
शिवस्तुती |
अरूण गंगाधर कोर्डे |
| काव्य |
II तो स्पर्शच नवा होता II |
सिद्धेश्वर विल… |
| काव्य |
आठवणींचा पाऊस |
निमिष सोनार |
| काव्य |
नियतीचा खेळ (एकच चारोळी दोन पद्धतीने) |
निमिष सोनार |
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II मास्तर म्हणतात पोरांना , पिरेम लय वाईट II |
सिद्धेश्वर विल… |
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एक अधिक एक... |
अत्रुप्त आत्मा |
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बाप हा ताप नसतो, पोरा |
सिद्धेश्वर विल… |
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विठोबा |
पिशी अबोली |
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II मी प्रेमपुरीचा विठ्ठल II |
सिद्धेश्वर विल… |