| काव्य |
मी गेल्यावर |
पुष्कराज |
| काव्य |
आल्यावर असा येशील की... |
फटू |
| काव्य |
( आयपीएल चा खेळ रे) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
होकार |
शा॑तेच कारट |
| काव्य |
"जीवन-मरण" |
शा॑तेच कारट |
| काव्य |
थोडंसं तूही समजून घे... |
फटू |
| काव्य |
प्रियेच्या भेटी |
पुष्कराज |
| काव्य |
सोडुनी गेलास जिथे.... |
शा॑तेच कारट |
| काव्य |
पकलो आता, फार झाला |
चेतन |
| काव्य |
पुन्हा आसपास |
आंबोळी |
| काव्य |
माणसं अशी का वागतात? |
चतुरंग |
| काव्य |
सेल मांडीयेला |
अरुण मनोहर |
| काव्य |
(आसपास) |
चतुरंग |
| काव्य |
आसपास |
सन्जोप राव |
| काव्य |
स्वप्नपरी |
पुष्कराज |
| काव्य |
गुलाबाचे काटे |
पुष्कराज |
| काव्य |
भासा सूद्धी |
विजुभाऊ |
| काव्य |
(नको) |
चतुरंग |
| काव्य |
कुणी मत देता का मत? |
विसोबा खेचर |
| काव्य |
सहज |
चेतन |
| काव्य |
गुलाबाचा सण |
पुष्कराज |
| काव्य |
हिमेश बाबाच्या सौजन्याने... |
फटू |
| काव्य |
शिवमानसपूजा - आदि शंकराचार्य! |
चतुरंग |
| काव्य |
(........आकाशाशी जडले नाते !!) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
देवा......एवढी दया नको रे दाखवू... |
सागर |
| काव्य |
"थेंब" |
चेतन |
| काव्य |
संपत असताना सारं काही... |
फटू |
| काव्य |
(उभी भिंत डागाळलेली मुळाशी) |
चतुरंग |
| काव्य |
पोरखेळ ! |
संदीप चित्रे |
| काव्य |
सार काही क्षम्य असतं |
विजुभाऊ |