(हे पुस्तक मी मैथिलीसाठी, म्हणजे माझ्या अडीच वर्षांच्या पुतणीसाठी बनवले होते. आता तिने बघितले आहे, मग आणखी लोकांनी गंमत लुटायला हरकत नाही. चित्रे माझी मैत्रीण आंद्रेया ग्रानादोस हिने काढली आहेत. त्यामुळे चेहरे दक्षिण-अमेरिकन आहेत, मराठमोळे नाहीत! तिला मराठी मुळीच येत नाही. माझ्या अशा-तशा अनुवादाला अनुसरून आणि वेड्यावाकड्या स्केचेसचा अर्थ लावून तिने ही चित्रे काढली आहेत! तिचे आभार मी मानावे तितके कमीच...)
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विंचवाचे लगीनघाईचे चर्हाट
म्हणतो सासर करायचे कर्हाड
चला रे चला, जमतंय वर्हाड!
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वरवंड गावचे सुरवंट राव
"कोण तुम्ही?" - आणतात आव
मोठाच त्यांचा बडेजाव!
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धामनगावचा धामण साप
"येत नाही," म्हणतो - "लागतेय धाप"
आळशी कुठला - मारतोय थाप!
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गांगल गावची गोगलगाय
वेळेवरती पोचलीच नाय
म्हणून रडातेय मोकलून धाय
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वाशीवरून आणता राशी
दागिन्यांची मोठी खाशी
वेशीपाशी शिंकली माशी
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इंगळी म्हणाली, "विंचवा येवू?
कर्हाडचे वर्हाड बाजूला ठेवू
तुझे-माझेच लगीन लावू
पाठीवरच्याच घरात राहू!"
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वाचने
12704
प्रतिक्रिया
42
मिसळपाव
प्रतिक्रिया
बेष्ट...पण
कोणास ठाऊक
In reply to बेष्ट...पण by घाटावरचे भट
फक्कड!!!
मस्त
आता दिसत
हाहाहा
हेच म्हणते
In reply to हाहाहा by बेसनलाडू
फारच भारी चित्रे
खूप सुन्दर!
फार छान
नंदन
मराठी साहित्यविषयक अनुदिनी
अगदी,
In reply to फार छान by नंदन
वा!
छान आहे..
धनंजय, खूप
+१
In reply to धनंजय, खूप by अनामिक
धनंजय
क्लासीक!!!
सुंदर !
सुंदर !
मस्त
चित्रे ओळी
बढीया
सुंदर..
वा ! मस्त
वाचता वाचता
खूप आधी
मस्त!
वा !
In reply to मस्त! by प्रमोद देव
मस्तम मस्त
सक्काळी सक्काळी
खुपच सुदंर.
सुरेखच रे धन्याशेठ!
सर्वांना धन्यवाद
फारच सुरेख
खुपच सुंदर कविता व चित्रे....
फार छान
मस्त
वा मस्त
मस्तच !
खुप सुंदर
सलाम
जबरदस्त