पाडगांवकरांचे सहस्त्रचंद्र दर्शनाचे वर्ष
मंगेश पाडगांवकर हे आज ८० व्या वर्षांत पदार्पण करीत आहेत. त्या निमित्त त्यांना सलाम.
चिपचिपे दूध से नहलाते हैं
आंगन में खड़ा कर के तुम्हें ।
शहद भी, तेल भी, हल्दी भी, ना जाने क्या क्या
घोल के सर पे लुंढाते हैं गिलसियां भर के
औरतें गाती हैं जब तीव्र सुरों में मिल कर
पांव पर पांव लगाये खड़े रहते हो
इक पथरायी सी मुस्कान लिये
बुत नहीं हो तो परेशानी तो होती होगी ।
जब धुआं देता, लगातार पुजारी
घी जलाता है कई तरह के छौंके देकर
इक जरा छींक ही दो तुम,
तो यकीं आए कि सब देख रहे हो ।
देवाच्या अस्तित्वावर, धार्मिक रुढींवर आणि सभोवतालच्या दांभिकतेवर एकाच वेळी सौम्य शब्दात प