| काव्य |
मोबाइल उचलला |
प्रा सुरेश खेडकर |
| काव्य |
धुन्दी - विडंबनाचा एक प्रयत्न |
चेतन |
| काव्य |
उघड "बार" देवा आता , उघड "बार" देवा |
उदय सप्रे |
| काव्य |
दिवस जुने ते स्मरायचे |
केशवसुमार |
| काव्य |
मी नाही अभ्यास केला |
देवदत्त |
| काव्य |
टवाळ्क्या |
चेतन |
| काव्य |
पुण्यातील एका स्कूटरचे आत्म(घातकी)व्रूत्त्.....(तमा पुणेकरांची "स्थूल्"मानाने क्षमा मागून) |
उदय सप्रे |
| काव्य |
डोळे हे जुल्मी गडे.....रेखाटन |
वर्षा |
| काव्य |
(एका माळेचे मणी) |
केशवसुमार |
| काव्य |
भविश्यातिल रिलायन्स ग्रुप IPO |
शरुबाबा |
| काव्य |
हिंदू.. |
विवेकवि |
| काव्य |
भाषा मराठी.. |
विवेकवि |
| काव्य |
मी.. |
विवेकवि |
| काव्य |
'सेने'तिल काटे... |
चतुरंग |
| काव्य |
जोक |
सत्या |
| काव्य |
काटा रुते कुणाला, बोंबील खाती कोणी |
ॐकार |
| काव्य |
बायको नावाचे वेगळेच प्रकरण आपल्या पुढे येते.... |
विजुभाऊ |
| काव्य |
कविता सुचे कुणाला ... |
केशवसुमार |
| काव्य |
'बाटा' रुते.. |
चतुरंग |
| काव्य |
बोले हो बॉस कुणाला (विडंबन गीत), काटा रूते कुणाला (मूळ गीत) |
प्रा सुरेश खेडकर |
| काव्य |
अथांग सागर |
सुवर्णमयी |
| काव्य |
सळसळणार्या फांद्यांवरती शेंगा फिक्क्ट सोनेरी |
ॐकार |
| काव्य |
जेव्हा तिची नि माझी ... |
केशवसुमार |
| काव्य |
(कुणि जाल का, सांगाल का..) |
चतुरंग |
| काव्य |
((कुणि जाल का, सांगाल का..)) |
केशवसुमार |
| काव्य |
चाळ ही हदरून जाते |
केशवसुमार |
| काव्य |
(वाट) |
केशवसुमार |
| काव्य |
सुनीतः एक प्रयत्न |
ऋषिकेश |
| काव्य |
विडंबन - तोच नौरोबा घरात, स्थूल आणि स्वस्थ ही |
अविनाश ओगले |
| काव्य |
विडंबन - जे खावे पचण्याचे वय निघून गेले |
अविनाश ओगले |