| काव्य |
पंचशील ..........संभोगाच्या अपूर्ण कथा |
पालीचा खंडोबा १ |
| काव्य |
अंधार वेशी वरचे |
निनाव |
| काव्य |
चारोळ्या |
विश्वव्यापी |
| काव्य |
टिटवी, म्हातारी आणि भुजंग |
पालीचा खंडोबा १ |
| काव्य |
शब्द |
विश्वव्यापी |
| काव्य |
अरे या ना रे |
जव्हेरगंज |
| काव्य |
एका प्रेमाची गोष्ट |
विश्वव्यापी |
| काव्य |
धुक्यात हरपले कुंचले |
पालीचा खंडोबा १ |
| काव्य |
नारी नारी (हिशम अब्बास) या गाण्याचं विडंबन |
वेल्लाभट |
| काव्य |
एल्गार स्वरांचा |
महासंग्राम |
| काव्य |
नव्याने ... |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
बाबा तू चुकला रे |
मित्रहो |
| काव्य |
मुमुक्षु |
नगरीनिरंजन |
| काव्य |
अमृतप्याला |
वेल्लाभट |
| काव्य |
| विस्थापित वेदना | |
पालीचा खंडोबा १ |
| काव्य |
मावळत्या या संध्याकाळी .... |
सत्य धर्म |
| काव्य |
'पावली' (विडंबन) |
DEADPOOL |
| काव्य |
ती धावली ...... (विडंबन) |
दमामि |
| काव्य |
ती सावली |
संदीप डांगे |
| काव्य |
दमामिने माझी कविता पळवली |
जव्हेरगंज |
| काव्य |
लंगोट तुझा ना राहिला, ना अस्थीही तुझ्या राहिल्या |
माहितगार |
| काव्य |
करवाचौथ |
महासंग्राम |
| काव्य |
उत्सर्जन |
पालीचा खंडोबा १ |
| काव्य |
शिकार (गझल) |
शार्दुल_हातोळकर |
| काव्य |
(जिलेबी कथा - लिहायचे नियम) |
चांदणे संदीप |
| काव्य |
यार |
पालीचा खंडोबा १ |
| काव्य |
आतातरी............ |
एक एकटा एकटाच |
| काव्य |
अस्थी |
अत्रुप्त आत्मा |
| काव्य |
क्षणो क्षणी |
विश्वव्यापी |
| काव्य |
पुन्हा मुकाट पेरतोच स्वप्न अंगणात मी |
विशाल कुलकर्णी |