| साहित्य प्रकार | शीर्षक | लेखक | प्रतिक्रिया शीर्षक | प्रतिक्रिया लेखक |
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| जे न देखे रवी... | बाप.. | चिगो | निशब्द मित्रा | गणेशा |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी- ऑक्टोबर ते डिसेंबर-२०२६ | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | दीपके यांच्यासारख्या व्हिसल… | पाषाणभेद |
| भटकंती | 🌊🚢 अथांग समुद्राच्या कुशीतला एक अविस्मरणीय प्रवास... 🚢🌊 | फिझा | खर्च | स्वधर्म |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी । सप्टेंबर २०२६ | भाद्रपद २०४८ | कांदा लिंबू | गुजरात उच्च न्यायालयाच्या… | श्रीगुरुजी |
| जे न देखे रवी... | मिसळीपेक्षा पिंड बरे | श्रीगुरुजी | कावळ्यावर लिहिलेली एक | अनन्त्_यात्री |
| जे न देखे रवी... | मिसळीपेक्षा पिंड बरे | श्रीगुरुजी | एकदम मजेशीर! मजा आली. … | श्रीगुरुजी |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी । सप्टेंबर २०२६ | भाद्रपद २०४८ | कांदा लिंबू | अरे बापरे... मी इतके दिवस उगाच निर्धास्त राहिलो होतो... | ज्ञानोबाचे पैजार |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी- ऑक्टोबर ते डिसेंबर-२०२६ | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | जौद्या, लढा यशस्वी करून… | अमरेंद्र बाहुबली |
| जे न देखे रवी... | मिसळीपेक्षा पिंड बरे | श्रीगुरुजी | मिसळी पेक्षा पिंड बरा (सणदरभासहित) | ज्ञानोबाचे पैजार |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी । सप्टेंबर २०२६ | भाद्रपद २०४८ | कांदा लिंबू | चांगली बातमी | चंद्रसूर्यकुमार |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी- ऑक्टोबर ते डिसेंबर-२०२६ | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | असं नसतं... | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी । सप्टेंबर २०२६ | भाद्रपद २०४८ | कांदा लिंबू | अत्यंत योग्य निर्णय!… | श्रीगुरुजी |
| भटकंती | 🌊🚢 अथांग समुद्राच्या कुशीतला एक अविस्मरणीय प्रवास... 🚢🌊 | फिझा | छान प्रवास वर्णन!!ही cruise… | चबुगबाळे |
| भटकंती | 🌊🚢 अथांग समुद्राच्या कुशीतला एक अविस्मरणीय प्रवास... 🚢🌊 | फिझा | इथे सगळं नीट टाईप करता येतं | फिझा |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी- ऑक्टोबर ते डिसेंबर-२०२६ | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | दिपके उपटसुंभ? का तर नालायक… | अमरेंद्र बाहुबली |
| भटकंती | 🌊🚢 अथांग समुद्राच्या कुशीतला एक अविस्मरणीय प्रवास... 🚢🌊 | फिझा | मलाही चित्र दिसत नाही | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी- ऑक्टोबर ते डिसेंबर-२०२६ | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | ऑक्टोबर ते डिसेंबर-२०२६ ??… | Bhakti |
| काथ्याकूट | चालू घडामोडी- ऑक्टोबर ते डिसेंबर-२०२६ | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | लोक आपले वैफल्य आणि नैराश्य… | सुबोध खरे |
| जे न देखे रवी... | मिसळीपेक्षा पिंड बरे | श्रीगुरुजी | पितृपक्षात कावळे धमाल करतातच… | श्रीगुरुजी |
| जे न देखे रवी... | बाप.. | चिगो | नि:शब्द 😶 | श्वेता व्यास |
मिसळपाव