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मोहब्बत..

लेखक विनायक पन्त यांनी मंगळवार, 16/02/2016 14:43 या दिवशी प्रकाशित केले.
मेरे बिना वो खुश है तो शिकायत कैसी,अब उसको खुश भी ना देख सकु तो मोहब्बत कैसी...
काव्यरस
लेखनविषय:

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प्रतिक्रिया 15

प्रतिक्रिया

In reply to by प्रचेतस

आवरा. -दिलीप बिरुटे

शिकायत भी है, मोहोब्बत भी है ,ये सियासत है कैसी.. सब कुछ सेह लिया अब पत चला ये जिन्दगानी हि है ऐसी...PK

धागा उडण्यासाठी 'अर्ज' करतो! :P अहो मराठी संस्थळ आहे, राहणार नाही धागा.. जरा रसग्रहण वगैरे टाका जर इतकच लिहायचं असेल तर

In reply to by खेडूत

उनके सिर्फ आसपास होने के एहसास से बदन मे दौडने लागता है लाव्हा वो भी हमे देख मुस्कुराती है और बडे प्यार से बोलती है, "कसा आहेस भावा?", पैजारबुवा,

=)))))

मोहब्बत हर चीज से महोब्बत करवाती है खिलते फुलोंसे, बहती हवावोंसे बाते करवाती है

तेरी यादों के नशे मेँ............. अब चूर हो रहा हूँ............. लिखता हूँ तुम्हेँ और.......... मशहूर मै हो रहा हू........