माझे एक गुरुवर्य ( डॉ अरोरा)सेक्स विषयक काउन्सीलिंग करताना
सेक्स आणि सुहाग रात्र याचे एक उत्तम उदाहरण देतात.
ते म्हणत.
तुम्हे क्या लगता है सुहाग रात को क्या होता है. तुम जब पहली बार सेक्स करते हो तो क्या होता है.
वो फिल्मोमे दिखाते है वैसे उपरसे आसमान से फूल बरसते है?
फिजॉ खुश्मिजाज हो जाती है? स्वर्ग से देवता आके तुमपर फूल बरसाते है?
ऐसा कुछ नही होता.
मै बताता हुं कैसा लगता है
ऐसा समझो के तिम्ह जोरकी टट्टी लगी है. बहुत देर तक कोई संडास मे जा बैठा है . तुम एक हात पिछे और दूसरा हात पेट पर रख्खे खडे हो.
संडास खुल जाता है तुम अन्दर जातो हो. और मौका मिलता है इतनी देर के बाद पेट विस्फोटक ढंग से खाली हो जाता है. तुम्हे उस समय जो सुकुन मिलता है. ठीक उतनाही और वैसाहे सुकुन उस वक्त भी मिलता है जब तुम्हारा पहली बार हो जाता है.
तरुणामधले ते आकर्षण डॉ अरोरा एका फटक्यात काढुन टाकत असत.
रजनीश म्हणतात की हम ये बाते आदतन करते है. बचपन मेम चलना सीखा अब हम चलनेवाली मशीन बन गये है. वो बात भी हम आदतन करते है. इट बीकम्स अ रुटीन
डोक्यावर बर्फ आणि जिभेवर साखर ठेवण्यापेक्षा त्या बर्फाचा आणि साखरेचा वापर करुन आईसक्रीम करा . प्रश्न निर्माणच होणार नाहीत
प्रतिक्रिया
माझे एक
जय हे