या जन्मावर, या जगण्यावर, शतदा प्रेम करावे
- यशवंत देव यांच्या गीताचे स्वैर रुपांतर
- बहुगुणी, ऑगस्ट ८, २००८
शक्य झाल्यास चालीतही गाता यावं असा प्रयत्न आहे.
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इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
दिल सौ बार लुटाएं
इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
चंचल झोंके, जलकी धारा, भीगी काली मिट्टी
जैसे प्राण हो हरे भरे, निकल पडी तृणपत्ती
फूल शर्मिले देखके किसकी, होठोंकी याद आए
इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
रंगोंका फैलाकर पंखा, सांझ ये किसने बना ली
रैनाके दरवाजेपर जैसी, तारोंकी रंगोली
छे ऋतुओंकी हो छे मेहेफ़िलें, यहींपर दर्द हटाएं
इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
नन्हे होठोंसे बच्चेकी, जैसे बोली आती
प्रीत प्रियाकी जन्म फूलोंसे जैसे लतापर लेती
नदीकिनारे सजनी जैसे तनहा गीत सुनाए
इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
इन होठोंसे चूम लूं मैं भी, बार बार मिट्टी ये
कई मर्तबा जां निछावर हो, यहींके जीने सच्चे
यहां के पीपल पत्ते पर ही, जिंदगी तैरती जाए
इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
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मराठीतील
मस्त!!
ही कविता मंगेश पाडगावकरांची
मुलतः अनुवादांची संकल्पना