पावसा पावसा पड रे
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पावसा पावसा पड रे
लागू देत झड रे
पाऊस पडला संततधार
सगळं झालं हिरवंगार
रान सारे चिंब झाले
वाहू लागले नद्या नाले
पावसा पावसा पड रे
लागू देत झड रे
काव्यरस
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