| साहित्य प्रकार | शीर्षक | लेखक | प्रतिक्रिया |
|---|---|---|---|
| जनातलं, मनातलं | मराठी माणसाने काय करावे - फतवा! | विकेड बनी | 11 |
| जनातलं, मनातलं | इट मेक्स सम सेन्स.......आठवण. | श्रीकृष्ण सामंत | 7 |
| जनातलं, मनातलं | काव्यकर्तनालय बंद होते तेव्हा..! | चतुरंग | 7 |
| जनातलं, मनातलं | इलाहींचा आशीर्वाद... | विसोबा खेचर | 6 |
| जनातलं, मनातलं | आमच्या १० वी ची पंचविशी.. | स्वाती दिनेश | 40 |
| जनातलं, मनातलं | उकडीचे मोदक | शेखर | 21 |
| जनातलं, मनातलं | लोकसभेतील चर्चा | आनंद घारे | 3 |
| जनातलं, मनातलं | जर असं झालं तर.... | सरपंच | 0 |
| जनातलं, मनातलं | "रौशनी " | विजुभाऊ | 32 |
| जनातलं, मनातलं | आमचे मित्र श्रीयुत "मी,माझं,मला" | श्रीकृष्ण सामंत | 4 |
| जनातलं, मनातलं | 'कम्युनल' विरोधाच्या नावाखाली चालणारा संधिसाधुपणा | चिन्या१९८५ | 90 |
| जनातलं, मनातलं | साहित्य सन्मेलन - काही विचार | दीप्या | 9 |
| जनातलं, मनातलं | मोरारजी आणि जेठमलानी | अजय | 3 |
| जनातलं, मनातलं | अनमोल ठेव..... | उदय सप्रे | 0 |
| जनातलं, मनातलं | अरे पावसा पावसा, तु आहेस तरी कुठं !!! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | 22 |
| जनातलं, मनातलं | मासे पण शिकवतात | श्रीकृष्ण सामंत | 6 |
| जनातलं, मनातलं | माझं आवडतं नाटक : फ़ायनल ड्राफ़्ट | भडकमकर मास्तर | 25 |
| जनातलं, मनातलं | पालकांची भाजी | विनायक प्रभू | 10 |
| जनातलं, मनातलं | "लाख चूका असतील केल्या" | श्रीकृष्ण सामंत | 0 |
| जनातलं, मनातलं | "गाण्यातली लय!" - तात्या उवाच! (भाग १) | विसोबा खेचर | 40 |
| जनातलं, मनातलं | ने मजसि ने... | विसोबा खेचर | 11 |
| जनातलं, मनातलं | पानसेबाई | संदीप चित्रे | 17 |
| जनातलं, मनातलं | गुरु- एक मार्गदर्षक | राधा | 5 |
| जनातलं, मनातलं | "उघड्यावरची' कारवाई | आपला अभिजित | 1 |
| जनातलं, मनातलं | कृतज्ञता.....गुरुपौर्णि,एनिमित्त लिहिलेला एक लेख | उदय सप्रे | 18 |
| जनातलं, मनातलं | काळ्या ढगाभोवतालची चंदेरी किनार | श्रीकृष्ण सामंत | 3 |
| जनातलं, मनातलं | भटका कुत्रा | स्वाती फडणीस | 10 |
| जनातलं, मनातलं | आदर करण्याची कदर | श्रीकृष्ण सामंत | 1 |
| जनातलं, मनातलं | डॉ.काशिनाथ घाणेकर | उदय सप्रे | 9 |
| जनातलं, मनातलं | असावी मुलगी एक तरी | श्रीकृष्ण सामंत | 12 |