| काथ्याकूट |
विनायक प्रभू, एक समुपदेशक.... |
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| जे न देखे रवी... |
हिच जगाची रीत असावी |
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| जनातलं, मनातलं |
सीमापाश |
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| कलादालन |
कुणी मला राग सांगेल का ? |
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| जनातलं, मनातलं |
"कढी,सार,ताक असात तां!" (असेल ते) |
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| जे न देखे रवी... |
जीवन म्हणजे नक्की काय असतं ? |
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| जे न देखे रवी... |
विडंबन : सफरचंद |
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| जनातलं, मनातलं |
तेरा घर-मेरा घर |
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| जनातलं, मनातलं |
कुणाची गं तू? |
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| कलादालन |
रोज गार्डन - चंदिगड |
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