| प्रकार | शीर्षक | प्रकाशित Sort ascending | प्रतिसाद |
|---|---|---|---|
| जनातलं, मनातलं | अँबी वॅली - बियाँड दि हेवन ! | 125 | |
| जनातलं, मनातलं | मी (चुकून) संपादक झालो तर ! | 96 | |
| जनातलं, मनातलं | द क्लिफ ! | 22 | |
| जनातलं, मनातलं | शतशब्दकथा स्पर्धा-२०१७ कांचनमृग | 3 | |
| जनातलं, मनातलं | शब्दप्रधान गायकी : यशवंत देव | 24 | |
| जनातलं, मनातलं | नसतेस घरी तू जेव्हा | 24 | |
| जनातलं, मनातलं | हमने तो दिल को आपके कदमों पे रख दिया | 3 | |
| जनातलं, मनातलं | मी हजार चिंतांनी हे डोके खाजवतो ! | 103 | |
| जनातलं, मनातलं | आताशा.. असे हे.. मला काय होते | 20 | |
| जे न देखे रवी... | नव गृहाचे कर्जही, फेडणे आता उभ्याने ! | 13 |