| जनातलं, मनातलं |
अँबी वॅली - बियाँड दि हेवन ! |
|
| जनातलं, मनातलं |
मी (चुकून) संपादक झालो तर ! |
|
| जनातलं, मनातलं |
द क्लिफ ! |
|
| जनातलं, मनातलं |
शतशब्दकथा स्पर्धा-२०१७ कांचनमृग |
|
| जनातलं, मनातलं |
शब्दप्रधान गायकी : यशवंत देव |
|
| जनातलं, मनातलं |
नसतेस घरी तू जेव्हा |
|
| जनातलं, मनातलं |
हमने तो दिल को आपके कदमों पे रख दिया |
|
| जनातलं, मनातलं |
मी हजार चिंतांनी हे डोके खाजवतो ! |
|
| जनातलं, मनातलं |
आताशा.. असे हे.. मला काय होते |
|
| जे न देखे रवी... |
नव गृहाचे कर्जही, फेडणे आता उभ्याने ! |
|