सुखाचिये शोधी | भ्रमसी रे वाया |
अंतरीचा ठेवा | पाहसी ना ||
जगी या मांडल्या | सुखाचिया पेठा |
सुख घेता ओठा | नष्ट शून्य ||
दया करोनिया | संते दिले गुज |
रामनाम बीज | उच्चारी तू ||
नामे उद्धरिल्या | पापियांच्या व्यथा |
तुझी काय कथा | सांगसी तू ||
सागर लहरी | अनंत उठती |
शमवुनी चित्ती| शांत व्हावे ||
- सागरलहरी
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वाहवा ....
+१
In reply to वाहवा .... by लिखाळ
+२
In reply to +१ by चाणक्य
सुंदर!
हेच म्हणते,
In reply to सुंदर! by राघव
खूप छान