"तो सलीम राजपुत्र" ह्या मराठी गीताचा हिंदी अनुवाद !
लेखनविषय:
तो सलीम राजपुत्र
मूळ मराठी गीतकारः अनिल भारती, संगीतः गजानन वाटवे, गायकः गजानन वाटवे
प्रीतीची आसवे पत्थ्थरात पाझरली | तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली || धृ ||
अनोळखी शिपाईगड्या एकदाच पाहिले | शूराच्या चरणावर मस्त हुस्न वाहिले ||
इष्काच्या दरबारी चांदरात बरसली | तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली || १ ||
बंड करून उठली तलवार सलीमाची | राजनिष्ठ, राजबीज आस मोंगलांची ||
अकबरच्या न्यायकसोटीस प्रीत उतरली | तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली || २ ||
ते शराबी नयन कधी कुणा नाही डरले | राजा वा रयतेला ना कधीच घाबरले ||
मिलनच्या वाटेवर भिंत जरी बांधली | तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली || ३ ||
अल्लाच्या दरबारी दोन पाखरे जुळी | पंख मिटून मूकपणे चढली एका सुळी ||
तो पतंग ती शमा एकसाथ जाळली | तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली || ४ ||
वो सलीम राजपुत्र
पत्थ्थर में झर लिए प्रिती के आसू भी | वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली || धृ ||
अन्जान इक सिपाही को देखा एकबार था | शूर के चरण में तबही मस्त हुस्न झुक लिया |
इष्क के महफिल में देख, चाँदरात हो गई | वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली || १ ||
कर बगावत उठी तरवार वो सलीम की | राजनिष्ठ, राजबीज आस मोंगलों की ||
अकबर के न्यायनिकष पर भी प्रीत कस ली | वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली || २ ||
वो शराबी नयन कभी डरे ना किसीसे | राजा वा रंक से वो कभीभी ना डरे ||
मिलन की राह में दीवार क्यूँ न बाँध ली | वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली || ३ ||
अल्लाह की दुनिया में, जुडवा थे, दो पंछी | पर मिट के एकसाथ, चढ गये दोनो सुली ||
नामशेष वो पतंग, वो शमा भी रह गई | वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली || ४ ||
हिंदी अनुवाद: नरेंद्र गोळे २००७०३२८
हिंदीत अनुवाद करण्याची सोय मनोगतावर नाही. इथे अनुमती असावी अशी अपेक्षा आहे.
प्रशासनाने स्पष्ट करावे. मार्गदर्शन करावे.
वाचने
7752
वाचनखूण
प्रतिक्रिया
3
स्पष्टीकरण
माझं मत..
धन्यवाद मिसळपाव पंचायतन! धन्यवाद तात्या!