नवीन प्रतिक्रिया
| साहित्य प्रकार | शीर्षक | लेखक | प्रतिक्रिया शीर्षक | प्रतिक्रिया लेखक |
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| काथ्याकूट | विनम्र आवाहन.. | मिसळपाव पंचायत समिती | दुरुस्ती.. | सरपंच |
| जे न देखे रवी... | घाटातली पायवाट | धनंजय | अरे! | चित्रा |
| जनातलं, मनातलं | शाहीर ते शाहीर ! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | आवडला. | चित्रा |
| जे न देखे रवी... | घाटातली पायवाट | धनंजय | कविता मस्त रे ! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे |
| जनातलं, मनातलं | शाहीर ते शाहीर ! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | धन्यवाद ! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे |
| काथ्याकूट | अभिनंदन! | जगन्नाथ | माणूस :-) | कोलबेर |
| काथ्याकूट | अभिनंदन! | जगन्नाथ | माणूस! :) | विसोबा खेचर |
| जे न देखे रवी... | घाटातली पायवाट | धनंजय | आवल्डी | बाबुराव |
| जे न देखे रवी... | घाटातली पायवाट | धनंजय | छान | सहज |
| जनातलं, मनातलं | शाहीर ते शाहीर ! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | हेच म्हणतो | सहज |
| जे न देखे रवी... | घाटातली पायवाट | धनंजय | सुंदर! | विसोबा खेचर |
| जनातलं, मनातलं | शाहीर ते शाहीर ! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | सुरेख लेख | धनंजय |
| जनातलं, मनातलं | शाहीर ते शाहीर ! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | वा! | गुंडोपंत |
| जे न देखे रवी... | घाटातली पायवाट | धनंजय | वा! | गुंडोपंत |
| जनातलं, मनातलं | शाहीर ते शाहीर ! | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | लय भारी! | विसोबा खेचर |
मिसळपाव