किशन बिहारी नुर....२
सब मिपाकर्स को सलाम ,
माझ्या मागिल लेखावर नाहक चिखल्फेक झाल्यावर हि दुसरा लेख लिहिन्याची हिम्मत करत आहे.
मागिल लेखात श्री . नूर यांना मी कुठल्या का केटेगरीत असेना सर्वोत्तम असे कौतुक् पर म्हटले त्याची दखल ना घेता , आप ल्याला हवा तसा अर्थ काढुन वाद झाला , असो ....
यावर एक शेर आठवला पहिले तो देतो मग श्री. किशन यांची गझल.
इबादतो कि तरह मै ये काम करता हु !
जब भि मिलता हु पहले सलाम करता हु !!
( आरधने सारखे मी हे काम करतो , कुनालाही भेटलो कि पहिले अभिवादन करतो )
मुखालिफत से संवरती है शख्सियत मेरी !
मै दुश्मनो का बडा एहतेराम करता हु !!
( विरोधाने माझ्या व्यक्तिमत्वाला निखार येतो , मी माझ्या शत्रुंचा फारच आदर करतो )
dr.Bashir badar
वो लब के जैसे सागर-ए-सहबा दिखाई दे!
जुम्बिश जो हो तो जाम छलकता दिखाई दे!! (सागर-ए-सहबा = अंगूरी शराब का पयाला , जुम्बिश = कंपन )
उस तिशनालब की नींद न टूटे, खुदा करे!
जिस तिशनालब को ख्वाब में दरिया दिखाई दे!! ( तिशनालब= तहानलेला , दरिया= मोठी नदी )
कहने को तो उस निगाह के मारे हुए हैं सब!
कोई तो उस निगाह का मारा दिखाई दे!!
दरिया में यूँ तो होते हैं कतरे ही कतरे सब!
कतरा वही है जिसमें कि दरिया दिखाई दे!! ( कतरा = थेंब )
खाये न जागने की कसम वो तो कया करे!
जिसको हर ख्वाब अधूरा दिखाई दे!!
कयों आईना कहें उसे? पत्थर न कयों कहें!
जिस आईने मे अक्स न उनका दिखाई दे!! ( अक्स = प्रतिबिंब )
कया हुस्न है, जमाल है, कया रंग रूप है! ( जमाल = सुंदरता )
वो भीड में भी जाए तो तनहा दिखाई दे!! ( तनहा = एकटा )
फिरता हूँ शहरों-शहरों समेटे हर एक याद!
अपना दिखाई दे न पराया दिखाई दे!!
पूछूँ कि मेरे बाद हुआ उनका हाल क्या ?
कोई जो उस जनम का शनासा दिखाई दे!! ( शनासा = ओळखिचा )
कैसी अजीब शर्त है दीदार के लिए!
आँखे जो बंद हों तो वो जलवा दिखाई दे!!
ऐ "नूर" यूँ ही तरक-ए-मुहबबत मे कया मज़ा!
छोडा है जिसको वह भी तो तनहा दिखाई दे.............!! ( तरक-ए-मुहबबत = प्रेमप्रीय व्यक्ती>सोडणे)
किशन बिहारी नूर.
वालेकुम सलाम अश्फाक मियाँ...
@ मदनबाण
मला
रसग्रहन .... नक्कि प्रयत्न
सुरेख आहेत सगळेच शेर!!
सर्व जबरदस्त ... खालील ओळीतील
नाहक आरोप
Empty Vessels, makes more noise !!
क्या बात हे.....!!!!!!!!
वा
सुरेख शेर आहेत. धन्यवाद. सोबत