देवा ढळो नेदी | माझी चित्त वृत्ती |
देवा ढळो नेदी | माझी चित्त वृत्ती |
सदा पाहो दिठी | रूप तुझे ||
कष्टी हा संसार | व्यथाही अपार |
तरावया पार | हात दे गा ||
कर्तव्य स्मरून | राखावे ते धन |
परी अंत: करण| तुज पाशी ||
कटू बोल घेता | स्थिर ठेवी चित्ता |
तव नाम घेता | शांत करी ||
देवा तुझे चरणी | आलो सर्व हरोनी |
मज दया करोनी | सांभाळावे ||
- सागर लहरी २५.६.२०१०
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व्वा!
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