आवडले, तुम्ही सगळे वेगवेगळे भाषांतर धागे टाकण्यापेक्षा एकच धागा टाकाल काय?
मला वाटते, वाचायला सोपे पडेल. असो ही विनंती आहे.
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प्रतिसादात आणि स्वाक्षरीत मराठी संकेतस्थळांची जाहीरात करुन मिळेल. विद्रोही संकेतस्थळांना खास सुट. योग्य बोली सह संपर्क करावा.
मुखालिफत से संवरती है शख्सियत मेरी !
मै दुश्मनो का बडा एहतेराम करता हु !!
( विरोधाने माझ्या व्यक्तिमत्वाला निखार येतो , मी माझ्या शत्रुंचा फारच आदर करतो )
क्या बात है ! अजून येऊ द्या.
-दिलीप बिरुटे
मस्त
||विकास|| & बिरुटे यांच्या दोघांच्या वक्तव्याला +१
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हम नहीं वह जो करें ख़ून का दावा तुझपर
बल्कि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जायेंगे
३०-३-१०
लोग टुट जाते है एक घर बनाने मे!
तुम रहम नही खाते बस्तिया जलाने मे!!
( लोग उन्मळुन पडतात एक घर बनवन्यातच , तुम्हाला मुळीच करुणा येत नाही संपुर्ण वस्ती जाळतांना )
हर धडकते पथ्थर को लोग दिल समझते है !
उमरे बीत जाती है दिल को दिल बनाने मे !!
( प्रत्येक धड्धड्नार्या दगडाला लोक ह्रुद्य समझून घेतात , किती तरी हयाती सरतात ह्रुद्याला ह्रुद्य बनवन्यासठी )
dr.Bashir badar
३१-३-१०
सब ने मिलाये हाथ यहा तिरगी के साथ! ( तिरगी = काळोख )
कितना बडा मजाक हुवा रोशनी के साथ!!
शर्ते लगायी जाती नही दोस्ति के साथ !
किजीये मुझे कबुल मेरी हर कमी के साथ!!
dr.wasim barelawi
अश्फाकभाई,
हे सर्व शेर आपण लिहिलेले आहेत कां?
तसं असेल तर फारच छान आहेत. जे शेर मी स्वतः सुरू केलेल्या धाग्यावर चढवतो ते दुसर्यांचेच असतात. (आपुनको कविता-बिविता जमती नहीं!) पण चांगल्या कविता, शेरोशायरी वाचायला आवडते.
सुधीर काळे, जकार्ता
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हा दुवा उघडा: http://72.78.249.107/esakal/20100309/5306183452989196847.htm
३१ मार्च चे शेर काही खासच!!!!
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हम नहीं वह जो करें ख़ून का दावा तुझपर
बल्कि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जायेंगे
१-४-१०
अब के हम बिछडे तो शायद कभी ख्वाबो मे मिले!
जिस तरह सुखे हुवे फूल किताबो मे मिले !!
न तु खुदा है ना मेरा इश्क फरिश्तो जैसा !
दोनो इन्सान है तो क्यु इतने हिजाबो मे मिले!! ( हिजाब = परदा )
::अहमद फराज
२-४-१०
हमारी दोस्ती से दुश्म नी शर्माइ रहती है!
हम अकबर है हमारे दिल मे जोधाबाइ रहती है!!
किसी का पुछना कब तलक राह देखोगे ?
हमारा फैसला जब तलक बीनाइ रहती है ! ( बीनाइ= द्रुश्टी , power of eyes)
munawwar rana.
३-४-१०
जहालतो के सारे अन्धेरे मिटा के लौट आया ! (जहालत्= अद्यान )
मै आज सारी किताबे जला के लौट आया !!
सुना है सोना निकल रहा है वहा !
मै जिस जमिन पर ठोकर लगा के लौट आया!
राहत ईन्दोरी.
४-४-१०
अना[1]की मोहनी[2]सूरत बिगाड़ देती है
बड़े-बड़ों को ज़रूरत बिगाड़ देती है
किसी भी शहर के क़ातिल बुरे नहीं होते
दुलार कर के हुक़ूमत[3]बिगाड़ देती है
इसीलिए तो मैं शोहरत[4]से बच के चलता हूँ
शरीफ़ लोगों को औरत बिगाड़ देती है
शब्दार्थ:
1. ↑ आत्म-सम्मान
2. ↑ मोहक, मोहिनी
3. ↑ शासन
4. ↑ प्रसिद्धि
आपल्या सुचना आणि प्रतिक्रिया आमच्यासाठी अमुल्य आहेत, प्रतिक्षेत .........
६-४-१०
हर हाल मे बख्शेगा उजाला अपना ! ( बख्शेगा = देनार ) ( हर हाल मे =काही ही करुन )
चांद रिश्ते मे नही लगता है मामा अपना!!
मैने रोते हुवे पोछे थे किसि दिन आंसु!
मुद्दतो मा ने नही धोया दुपट्टा अपना !! ( मुद्दतो= लांब मुदती पर्यंत )
munawwar rana.
अश्फाक भाऊ, दर वेळेला प्रतिक्रिया देताच येत नाही मला तरी
पण तुमचे हे शेर रोज मी वाट बघते वाचण्यासाठी.
मिपावरचा प्रत्येक लेख मला समृद्ध करतो कणाकणानी.
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सजनि कौन तम में परिचित सा, सुधि सा, छाया सा, आता?
सूने में सस्मित चितवन से जीवन-दीप जला जाता!
आपल्या सुचना आणि प्रतिक्रिया आमच्यासाठी अमुल्य आहेत, प्रतिक्षेत .........
७-४-१०
हम अब मकान मे ताला लगाने वाले है!
सुना है आज घर मेहमान आने वाले है!!
हमे हकीर ना जानो हम अपने नेजे से !
गजल की आंख मे काजल लगाने वाले है!!
राहत ईन्दोरी.
छान आहेत शेर ७ एप्रिल चे. मला २रा आवडला विशेषकरून.
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I have always known that at last I would take this road, but yesterday I did not know that it would be today. - Narihara
आपल्या सुचना आणि प्रतिक्रिया आमच्यासाठी अमुल्य आहेत, प्रतिक्षेत .........
८-४-१०
सेहरा मे रह के कैस ज्यादा मजे मे है! (सेहरा=वाळवंट, कैस = मजनु चे खरे नाव )
दुनिया समझ रहीहै के लैला मजे मे है !!
परदेस ने हमे बरबाद कर दिया मगर!
मा सब से केह रहीहै के बेटा मजे मे है!!
munawwar rana.
अश्फाक भाउ हा धागा लयं आवडला...और भी आने दो.
मदनबाण.....
There is no need for temples, no need for complicated philosophies. My brain and my heart are my temples; my philosophy is kindness.
Dalai Lama
९-४-१०
इतना टुटा हु के छुने से बिखर जाउगा !
अब अगर और दुआ दोगे तो मर जाउगा!!
ज़िंदगी मैं भी मुसाफ़िर हूँ तेरी कश्ती का !
तू जहाँ मुझसे कहेगी, मैं उतर जाऊँगा !!
- मुईन नज़र
१०-४-१०
लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सम्भलते क्यूँ हैं !
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं !!
मैं न जुगनू हूँ दिया हूँ न कोई तारा हूँ !
रौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यूँ हैं !!
नीन्द से मेरा त'अल्लुक़ ही नहीं बरसों से ! ( त'अल्लुक़ = संबंध )
ख़्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यूँ हैं !!
मोड़ होता है जवानी का सम्भलने के लिये !
और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यूँ हैं !!
राहत ईन्दोरी.
११-४-१० रविवार
पेशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिले! ( पेशानियों = कपाळांवर , मुक़द्दर = नशिब )
दस्तार कहाँ मिलेंगे जहाँ सर नहीं मिले!! ( दस्तार = फेटा )
आवारगी को डूबते सूरज से रब्त है! ( रब्त= लगाव्/जवळीक )
मग़्रिब के बाद हम भी तो घर पर नहीं मिले!! ( मग्रिब = सुर्यास्ताची वेळ )
कल आईनों का जश्न हुआ था तमाम रात!
अन्धे तमाशबीनों को पत्थर नहीं मिले!! ( तमाशबीनों = प्रेक्षक )
मैं चाहता था ख़ुद से मुलाक़ात हो मगर!
आईने मेरे क़द के बराबर नहीं मिले!! ( कद्=उंची )
पर्देस जा रहे हो तो सब देखते चलो!
मुम्किन है वापस आओ तो ये घर नहीं मिले!!
राहत ईन्दोरी.
कल आईनों का जश्न हुआ था तमाम रात!
अन्धे तमाशबीनों को पत्थर नहीं मिले!! ( तमाशबीनों = प्रेक्षक )
मैं चाहता था ख़ुद से मुलाक़ात हो मगर!
आईने मेरे क़द के बराबर नहीं मिले!! ( कद्=उंची )
मार डाला!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
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I have always known that at last I would take this road, but yesterday I did not know that it would be today. - Narihara
अश्फाक भाउ...वाचतोय्.
बहोत बढीया. :)
मदनबाण.....
There is no need for temples, no need for complicated philosophies. My brain and my heart are my temples; my philosophy is kindness.
Dalai Lama
१२-४-१०
जब कभि बोलना वक्त पर बोलना !
मुद्दतो सोचना , मुख्तसर बोलना !! ( मुद्दतो= लांब मुदती पर्यंत ,मुख्तसर =थोडे से)
मेरि खानाबदोशी से पुछे कोइ ! ( खानाबदोशी = अस्थायी , भटके जीवन बंजारो की तरह )
कितना मुश्किल है रस्ते को घर बोलना!!
तहीर फराझ
१३-४-१०
ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे! ( गिला = तक्रार , शिकायत )
तू बहुत देर से मिला है मुझे!!
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल! ( तु प्रेमाने मला धोका तर दे ,
हार जाने का हौसला है मुझे!! ( माझ्यात पराभव पत्करन्याची हिम्मत आहे )
::अहमद फराज
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल! ( तु प्रेमाने मला धोका तर दे ,
हार जाने का हौसला है मुझे!! ( माझ्यात पराभव पत्करन्याची हिम्मत आहे )
मस्त!!!
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I have always known that at last I would take this road, but yesterday I did not know that it would be today. - Narihara
अश्फ़ाक भाउ...मस्त एकसे एक शेर देत आहेस...सुभानल्ला !!! :)
पण आज हा वर टाकलेला शेर तुम्ही आधीच दिला आहेत...तूमचा या धाग्याचा पहिलाच शेर पहा.
मदनबाण.....
There is no need for temples, no need for complicated philosophies. My brain and my heart are my temples; my philosophy is kindness.
Dalai Lama
माझी चूक झाली.
मदनबाण.....
There is no need for temples, no need for complicated philosophies. My brain and my heart are my temples; my philosophy is kindness.
Dalai Lama
१४-४-१०
मेरे खुलुस की गेहराई से नही मिलते ! ( खुलुस = सह्र्युदता )
ये झुटे लोग है सच्चाइ से नही मिलते !!
मुझे सबक दे रहे है वो मोहब्बत का !
जो ईद अप्ने सगे भाई से नही मिलते !!
राहत ईन्दोरी.
अश्फाक भाईजान,
तसलीम !
अगर आपको हमारी दखलअंदाजी बेअदबी नही लगती है तो अच्छी बात है, वरना माफी चाहते हुवे, हम आपको correct करना चाहेंगें..
खुलुस के माईने मराठी में सह्र्युदता नहीं होता
खुलुस माने अंग्रेजी में Clearness, purity होती है, जिसके मराठी में मायने (meaning) निर्मळता जो दिलकी भी हो सकती है
मेरे खुलुस की गहराई से नहीं मिलते
मायने,
मेरी दिल की साफ सुथरी सच्चाई के गहराई से नहीं मिलते
खुलुस - निर्मल - साफ सुथरा Clear , purity
बेशक , आपके सभी शेर लाजवाब है! :-)
~ वाहीदा
जझाक-अल्लाह ,
आपन दिलेले अर्थ अगदी बरोबर आहे जर , आपण खुलुस ला नाम ( noun ) म्हणुन वापरले तर ,
पन येथे विशेशन(adjective) म्हणुन वापरले आहे. ज्याचा अर्थ Sincerity,frankness असा ही होतो . असो प्रतिक्रीये बद्दल धन्यवाद.
Sincerity is the virtue of one who speaks truly about his or her own feelings, thoughts, desires.
जझाक-अल्लाह
इतनी बडीं दुवा दे दी और क्या चाहीये ...
तहे दिलसे शुक्रिया !!
अवांतर : मी तुम्हाला खुलुस या शब्दा बध्द्ल व्यनी तून बोलेन (सद्या कामाची गडबड अन ओन्साईट टेकनिक्ल डायरेक्ट ची लुड-बुड मागे लागली आहे :-( )
~ वाहीदा
आवडले,
व्वा !!
मस्त
विनंती -
३०-३-१०
मराठी अर्थ नको
३१-३-१०
हे सर्व शेर आपण लिहिलेले आहेत कां?
अश्फाक
खरंच. मी पाहिलं नव्हतं!
कॅन्सल
३१ मार्च
१-४-१०
@ नेत्रेश
२-४-१०
३-४-१०
वाह वाह ...
क्या बात है !
धन्यवाद
अश्फाक
@ अविनाशकुलकर्णी
४-४-१० अना[1]
५-४-१०
६-४-१०
अश्फाक
७-४-१०
छान आहेत
८-४-१०
अश्फाक भाउ
९-४-१०
क्या बात है...!
१०-४-१०
११-४-१० रविवार
कल आईनों
अहा...
वाह वाह...तब्बियत खुश कर दी
@ वेताळ
अश्फाक
क्या बात
१२-४-१०
वाह मियां
१३-४-१०
तू मोहब्बत
अश्फ़ाक
@मदनबाण...
ओह्ह...
१४-४-१०
खुलुस = निर्मळता
@ वाहीदा आपा
जहे नसीब !