लोटांगण — विशाल कुलकर्णी, Wed, 11/04/2009 - 10:58 प्रतिक्रिया द्या 1570 वाचन 💬 प्रतिसाद (3) ह्म्म्म. पक्या Wed, 11/04/2009 - 13:11 नवीन ह्म्म्म. सद्यपरिस्थितीवर छान कविता. सद्यपरिस् प्रभो Wed, 11/04/2009 - 13:16 नवीन सद्यपरिस्थितीवर छान कविता. --प्रभो ---------------------------------------------------------------------------------- काय सांगावे स्वतः विषयी,आहात तुम्ही सूज्ञ !! एका सारखे एकच आम्ही,बाकी सगळे शून्य !! धन्यवाद विशाल कुलकर्णी Wed, 11/04/2009 - 15:38 नवीन धन्यवाद :-) सस्नेह विशाल ************************************************************* आम्ही इथेही पडीक असतो "ऐसी अक्षरे मेळविन!"
सद्यपरिस् प्रभो Wed, 11/04/2009 - 13:16 नवीन सद्यपरिस्थितीवर छान कविता. --प्रभो ---------------------------------------------------------------------------------- काय सांगावे स्वतः विषयी,आहात तुम्ही सूज्ञ !! एका सारखे एकच आम्ही,बाकी सगळे शून्य !!
धन्यवाद विशाल कुलकर्णी Wed, 11/04/2009 - 15:38 नवीन धन्यवाद :-) सस्नेह विशाल ************************************************************* आम्ही इथेही पडीक असतो "ऐसी अक्षरे मेळविन!"
ह्म्म्म.
सद्यपरिस्
धन्यवाद