तू — ज्ञानदा कुलकर्णी, Mon, 06/22/2009 - 09:11 प्रतिक्रिया द्या 1321 वाचन 💬 प्रतिसाद (2) वडिलांवरच विसोबा खेचर Mon, 06/22/2009 - 11:00 नवीन वडिलांवरची कविता आवडली! तात्या. वा! क्रान्ति Mon, 06/22/2009 - 21:22 नवीन सुरेख कविता. क्रान्ति ध्यानम् मूलम् गुरुमूर्ति, पूजामूलम् गुरु पदम् मंत्र मूलम् गुरुवाक्यम्, मोक्षमूलम् गुरुकृपा अग्निसखा
वा! क्रान्ति Mon, 06/22/2009 - 21:22 नवीन सुरेख कविता. क्रान्ति ध्यानम् मूलम् गुरुमूर्ति, पूजामूलम् गुरु पदम् मंत्र मूलम् गुरुवाक्यम्, मोक्षमूलम् गुरुकृपा अग्निसखा
वडिलांवरच
वा!