असे पाहुणे येती, आणिक स्मृती ठेऊनी जाती... सुबक ठेंगणी यांनी Sun, 06/07/2009 - 10:34 · लेख लेख प्रतिक्रिया द्या 2024 वाचन 💬 प्रतिसाद (2) प्रतिक्रिया सापडला! क्रान्ति Sun, 06/07/2009 - 21:34 नवीन हरवलेला मुकादे सापडला! क्रान्ति ध्यानम् मूलम् गुरुमूर्ति, पूजामूलम् गुरु पदम् मंत्र मूलम् गुरुवाक्यम्, मोक्षमूलम् गुरुकृपा अग्निसखा हा हा हा! सहज Mon, 06/08/2009 - 09:04 नवीन छान लिहले आहे. मजा आली.
सापडला! क्रान्ति Sun, 06/07/2009 - 21:34 नवीन हरवलेला मुकादे सापडला! क्रान्ति ध्यानम् मूलम् गुरुमूर्ति, पूजामूलम् गुरु पदम् मंत्र मूलम् गुरुवाक्यम्, मोक्षमूलम् गुरुकृपा अग्निसखा
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हा हा हा!