| साहित्य प्रकार | शीर्षक | लेखक | प्रतिक्रिया |
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| जनातलं, मनातलं | सेपियन्स-(ऐसी अक्षरे -१७) | Bhakti | 6 |
| जनातलं, मनातलं | लपविलास तू हापूस आंबा -- विम्बल्डन | श्रीकृष्ण सामंत | 11 |
| जनातलं, मनातलं | माझं challenge (आव्हान) | श्रीकृष्ण सामंत | 11 |
| जनातलं, मनातलं | हिमालयातून सुरू झालेली माझी गोष्ट. . . | मार्गी | 0 |
| जनातलं, मनातलं | आ. ई. तु झी. आ. ठ. व. ण. ये. ते | श्रीकृष्ण सामंत | 27 |
| जनातलं, मनातलं | १/१/२१०२, स.न.वि.वि. | हेमंतकुमार | 19 |
| जनातलं, मनातलं | आवेग हृदयाचा की मनाचा असावा | श्रीकृष्ण सामंत | 3 |
| जनातलं, मनातलं | द लेडी ऑफ शालॉट : (भाग १) चित्र, कविता आणि 'आई'चा मराठी तर्जुमा. | चित्रगुप्त | 15 |
| जनातलं, मनातलं | एखाद्या ठिकाणाची आठवण करून देण्याची शक्ती वासात,गंधात, असते. | श्रीकृष्ण सामंत | 0 |
| जनातलं, मनातलं | धटिंगण रॉ आणी वॉशिंग्टन पोस्ट ची कावकाव | वडगावकर | 105 |
| जनातलं, मनातलं | चाय की चर्चा.. | आजी | 33 |
| जनातलं, मनातलं | माझ्या बद्दल थोडं | श्रीकृष्ण सामंत | 9 |
| जनातलं, मनातलं | “आई” म्हणजेच AI म्हणजेच आर्टिफिशियल इंटिलीजन्स | श्रीकृष्ण सामंत | 3 |
| जनातलं, मनातलं | शॉर्ट शॉर्ट फिक्शन. | भागो | 17 |
| जनातलं, मनातलं | मी आणि समुद्रकिनारा | श्रीकृष्ण सामंत | 23 |
| जनातलं, मनातलं | तेल,साखर, मीठ प्रमाणा बाहेर प्राशन करणं म्हणजे मधुमेहाला आ मं त्र ण करणं. | श्रीकृष्ण सामंत | 9 |
| जनातलं, मनातलं | समाजमाध्यमांवरील निरागसता | सर टोबी | 8 |
| जनातलं, मनातलं | हृदयसंवाद (३) : नाडी, रक्तदाब व ‘इसीजी’ | हेमंतकुमार | 9 |
| जनातलं, मनातलं | पाकिस्तान - ११ | अमरेंद्र बाहुबली | 1 |
| जनातलं, मनातलं | अमर प्रेमवीर शास्त्रज्ञ युगुल - मारी आणि पिअरे क्यूरी | सुधीर कांदळकर | 1 |
| जनातलं, मनातलं | अत्तराच्या कुपीतून दरवळणारा सुगंध. . . | मार्गी | 0 |
| जनातलं, मनातलं | जय रायरेश्वर | बिपीन सुरेश सांगळे | 1 |
| जनातलं, मनातलं | काही आम्ही आणि एक म्हातारा. | भागो | 6 |
| जनातलं, मनातलं | दर्शननं केला प्रवास | पराग१२२६३ | 5 |
| जनातलं, मनातलं | डॉ. ब्रायन वाईस ह्यांचं पुस्तक! | मार्गी | 29 |
| जनातलं, मनातलं | एक अनुभव | अहिरावण | 36 |
| जनातलं, मनातलं | एक लघुकथा. | भागो | 6 |
| जनातलं, मनातलं | हृदयसंवाद (२) : हृदयरचना आणि कार्य | हेमंतकुमार | 8 |
| जनातलं, मनातलं | एक अचानक मिपाकट्टा : चिंचवड | चौथा कोनाडा | 35 |
| जनातलं, मनातलं | जैवज्ञाता श्लोक-१ | Bhakti | 3 |