मेहबूब मेरे...
लेखनविषय:
काव्यरस
ईद के दिन कही घर से बाहर ना निकलना,
लोग चान्द समझके कही रोजा ना तोड दे,
खफा हो कर खुदा कही...
चान्द जैसे मुखडे बनाना ना छोड दे...
वाचने
3117
वाचनखूण
प्रतिक्रिया
18
आमचा पण एक गावठी बाण....
=))=))
दो बाण और....
In reply to दो बाण और.... by ज्ञानोबाचे पैजार
पैजारबुवा, इर्षाद!=))
लगे रहो पैजारबुवा
वो मेरेकु बोल्या इद के दिन
In reply to वो मेरेकु बोल्या इद के दिन by प्राची अश्विनी
वहा वा... वहा वा....
In reply to वहा वा... वहा वा.... by ज्ञानोबाचे पैजार
सीने में जलन
In reply to सीने में जलन by पैसा
एक तुफानी लेहर को पै तुम अ
In reply to एक तुफानी लेहर को पै तुम अ by प्राची अश्विनी
लेहर
In reply to लेहर by पैसा
एकदम दणदणीत शायरया आहेत
In reply to वहा वा... वहा वा.... by ज्ञानोबाचे पैजार
वहा वा... वहा वा....
पन्त काय म्हन्त्ता कसा वाटला मिपा मुशायरा
हुस्न कि क्या तारीफ करू आपकी .........
युं शायरी को ऐसे मत फेको
In reply to युं शायरी को ऐसे मत फेको by विजुभाऊ
अरारारारा , विजूबौ. लैच हो.
आज कल पाव जमीं पर नहीं पडते
In reply to आज कल पाव जमीं पर नहीं पडते by आदूबाळ
हे..हे..हे..हे