मेहबूब मेरे...
लेखनविषय:
काव्यरस
ईद के दिन कही घर से बाहर ना निकलना,
लोग चान्द समझके कही रोजा ना तोड दे,
खफा हो कर खुदा कही...
चान्द जैसे मुखडे बनाना ना छोड दे...
वाचन
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