अविस्मरणीय दिवस : ३०/११/२०१४
योगायोग, अकस्मात, अनपेक्षित हे शब्द आपण नेहमीच वापरत असतो. पण आजच्या दिवसाचे वर्णन कसे करावे तेच मला सुचत नाही. आजचा दिवस माझ्यासाठी अकल्पित आणि अफ़लातून ठरला आहे.
आज "माझी गझल निराळी" चे समिक्षण दैनिक प्रहारमध्ये प्रकाशित झाले. आजच महाराष्ट्र टाईम्स मध्ये माझी "ऊठ मर्दा ऊठ" ही कविता प्रकाशित झाली, आज दैनिक सकाळमध्ये "शतवर्ष नरा" ही कविता छापून आली आणि....
मुख्यमंत्र्यांच्या घरासमोर आजचे ठिय्या आंदोलन पोलिसांची एकही लाठी न खाता, बंदुकीची गोळी न खाताच सहजतेने सुखासुखी पार पडले.
इतके सारे अनुकूल योगायोग एकाच दिवशी घडून येणे, हे फ़ारच विलक्षण आहे.
{आजचे ग्रहमान/कुंडली वगैरे कशी होती हे एखाद्या भविष्यवेत्त्याला/जोतिष्याला विचारावे कि काय, अशी मनात जिज्ञासा जागृत झाली आहे. ;) }
एवढे मात्र नक्कीच खरे की,
आजचा ३०/११/२०१४ हा दिवस माझ्यासाठी अविस्मरणीय दिवस ठरला आहे.
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प्रतिक्रिया
....अभिनंदन.....!!!
कसे काय जमले हो ???
In reply to ....अभिनंदन.....!!! by विनोद१८
कसे काय जमले हो ???कदाचित जोतिष्यकार याचे उत्तर देऊ शकेल. तुम्हाला कुठून उत्तर मिळाले तर मला सांगायला मात्र विसरू नका. :)अभिनंदन ..
धन्यवाद
In reply to अभिनंदन .. by शेखर काळे
आजच्या दिवशी
नक्कीच थांबतील.
In reply to आजच्या दिवशी by यशोधरा
काय सांगताय?
In reply to नक्कीच थांबतील. by गंगाधर मुटे
शेतकर्यांच्या आत्महत्या
In reply to काय सांगताय? by यशोधरा
सवंग जाहिरातबाजी आणि उत्सव
In reply to शेतकर्यांच्या आत्महत्या by गंगाधर मुटे
जरा समजून सांगताय का?
In reply to सवंग जाहिरातबाजी आणि उत्सव by दिनेश सायगल
दुटप्पी धोरण...
In reply to शेतकर्यांच्या आत्महत्या by गंगाधर मुटे
शहरी-बिगरशहरी
In reply to दुटप्पी धोरण... by प्रभाकर पेठकर
बदलणार नाही हे माहीत आहेच.
In reply to शहरी-बिगरशहरी by गंगाधर मुटे
प्रभाकर पेठकर, तुम्ही बेछूट
In reply to बदलणार नाही हे माहीत आहेच. by प्रभाकर पेठकर
घोर गैरसमज आहे तुमचा....
In reply to प्रभाकर पेठकर, तुम्ही बेछूट by गंगाधर मुटे
उपप्रतिसाद
In reply to घोर गैरसमज आहे तुमचा.... by प्रभाकर पेठकर
सद्भावना दिवस.
धन्यवाद
In reply to सद्भावना दिवस. by कलंत्री
कुठला शेतकरी पायात बूट घालून
खिक्क
In reply to कुठला शेतकरी पायात बूट घालून by काळा पहाड
एखाद्या विषयावर भाष्य
In reply to खिक्क by रामपुरी
मुथुट,चिरूट,मुकुट, आणी आपलं काथ्याकूट पण बसतय की वो
In reply to कुठला शेतकरी पायात बूट घालून by काळा पहाड
याच्याबद्दल काय उत्तर आहे का?
In reply to मुथुट,चिरूट,मुकुट, आणी आपलं काथ्याकूट पण बसतय की वो by यसवायजी
ओ क्काक्का.. आता म्या काय
In reply to याच्याबद्दल काय उत्तर आहे का? by नाखु
ओ क्काक्का.. आता म्या काय केलं??
In reply to ओ क्काक्का.. आता म्या काय by यसवायजी
शहरात सुद्धा खूप
In reply to याच्याबद्दल काय उत्तर आहे का? by नाखु
आपण एवढे संवेदनाशील आहात आणी
In reply to शहरात सुद्धा खूप by गंगाधर मुटे
ऐन स्वामी.
In reply to आपण एवढे संवेदनाशील आहात आणी by यसवायजी
क्या ब्बात हय काक्का..
In reply to ऐन स्वामी. by नाखु
मस्नो जायलो येरालू
In reply to क्या ब्बात हय काक्का.. by यसवायजी
दुग्दुग्दधच्या नारबट्टो
In reply to ऐन स्वामी. by नाखु
यम?
In reply to मुथुट,चिरूट,मुकुट, आणी आपलं काथ्याकूट पण बसतय की वो by यसवायजी
बुटच घालायचा शेतकरी.
In reply to कुठला शेतकरी पायात बूट घालून by काळा पहाड
अभिनंदन..
धन्यवाद
In reply to अभिनंदन.. by योगी९००
अभिनंदन!
अभिनंदन
धन्यवाद मितभाषी