खाण्याला उपमा नाही
लेखनविषय:
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मूळ गीत : प्रेमाला उपमा नाही )
गीत - जगदीश खेबुडकर
संगीत - प्रभाकर जोग
स्वर - अनुराधा पौडवाल, सुरेश वाडकर
चित्रपट - कैवारी (१९८१)
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मी कसा टाळू हा शेट्टी, ते गत जन्मीचे देणे
खाण्याला 'उपमा' नाही हे ऊडप्याकडचे खाणे
मळकेपण पिउनी ओले
कपांचे कटिंग झाले
मी व्यथा फुल्पात्र का शोधू, हे 'फूल' म्हणू की 'अर्धे'
टमाटांची लेऊन प्युरी
हे क्रीम ओघळे खाली
मी कशी ओळखू जादू, हे पनीर म्हणू की छोले
का पित्ताने माथे विटती
खर्जात मग ढेकर उठती
मी कशी भावना बोलू, हे उदरभरण असे का गिळणे ?
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चु भू द्या घ्या
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प्रतिक्रिया
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वा वा..
वा वा
मस्त
सही रे...
:)
मस्तच! -सँड
हाहाहा
In reply to हाहाहा by बेसनलाडू
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