कांगारु
कांगारूंचा संघ | मस्तीत तो दंग|
भलतेच रंग | उधळीसे ||
भारताचा संघ | होतातरी दंग |
खेळण्यात भंग | रिकी करे||
अँड्र्यूचे मर्कट | लढवी तर्कट |
त्यालाही सपोर्ट | रिकी चा ह्या||
भज्जी तोही चिडे | काढता वाभाडे |
तरीही तो नडे | रिकी बाळ ||
नसते आरोप | करती ते खूप ||
दिला मग चोप | खेळामाजी ||
वामन सचिन | करतो हैराण |
घरचे मैदान | कुठे जाशी?||
एकदिस क्रिकेट | कांगारु ते धीट |
बोले फटाफट | संपवूया ||
धोणीनेही मग | बांधला तो चंग |
पाजली ती भांग | कांगारुंना ||
दोन्ही सामन्यात | लाविली ती वाट |
रहावे चड्डीत | कांगारूंनी ||
पुरे तरी आता | बाष्कळह्या बाता |
म्हणे बोध देता| 'चतुरंगे'||
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वाचनखूण
प्रतिक्रिया
20
वा...
रहावे
क्या बात है !!!!!!
सही :)
नंदन
मराठी साहित्यविषयक अनुदिनी
मस्त
In reply to मस्त by llपुण्याचे पेशवेll
हेच म्हणतो..
मस्तच!
In reply to मस्तच! by विसोबा खेचर
+१
शपथ्थ...
अभंग
अभंगाला दाद देणार्या आणि न देणार्या सर्व रसिकांचे आभार.
लै भारी :)
दोन्ही सामन्यात | लाविली ती वाट |
रहावे चड्डीत | कांगारूंनी ||
लै भारी,
सारेच अभंग जब्रा हायेत, असेच लिव्हित राव्हा :)
झकास.
मस्त
वा!
फारच छान
सही
क्रिकेट
फर्मास !!
फर्मास !!