हर दिन नया था हर
लेखनविषय:
हर दिन नया था हर साल चुनौती।
कभी जशन मनाया कभी लगी पनौती।
बाऱीश देखी सुखा देखा खुब लगी धूप।
जीदंगी के झमेले मे पापड भी बेले खुब।
किसी ने दिया साथ तो किसी ने बढने से रोका।
मीला किसीका आशिश तो किसीसे मीला। धोका।
खुब कमाया खुब लुटाया खाया मिल बाँट के ।
कभी किसीका रंज न किया जिंदगी गुजारी ठाठसे।
कभी किये फाँखे कभी खायी रस मलाई।
सारी माया प्रभूकी जीसने ऐश करायी।
पैसंठ गुजरे अब छासठ का युवा हूँ।
आप सबको धन्यवाद और
प्रभूसे स्वास्थ की दुआ करता हूँ।
वाचने
3009
वाचनखूण
प्रतिक्रिया
7
मस्तच!
In reply to मस्तच! by चांदणे संदीप
धन्यवाद
छान...!
मस्त.रॅप सॉन्ग करता येईल ह्या
सुचना योग्य आणि पटली,
In reply to सुचना योग्य आणि पटली, by कर्नलतपस्वी
हर दिन बदलाव है ,हर साल नया
सुचना योग्य आणि पटली,