सरफरोशी की तमन्ना
लेखनविषय:
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सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल मे है,
देखना है जोर कितना, बाजुए कातिल मे है !
करता नही दुसरा, कुच बातचीत,
देखता हु मै जिसे वो तेरी मेहफिल मे है !
ए शहिदे मुल्के-मिल्लत मै तेरे उपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा, गैर की मेहफिल मे है !
वक्त आने पे बता देन्गे, तुझे ए आसमा,
हम अभीसे क्या बताए, क्या हमारे दिल मे है !
खीन्चकर लाइ है सबको, कत्ल होने की उम्मीद,
आशिको का दम, घुटते हुए कातिल मे है !
देखना है जोर कितना, बाजुए कातिल मे है
सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल मे है,
देखना है जोर कितना, बाजुए कातिल मे है !
मुळ कवी >शहीद अशफाक्-उल्ला-खान
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अनिरुद्ध भाऊ...
हुतात्मा अशफाक उल्ला खान की हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल?
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