दवाई-ऐ-गुलजार!

अज्ञात जे न देखे रवी...
Gulzar इलाज करवाते हम वही से... जहा जख्म होते है दवाई के लिए जहां पल गुजरे बिना घडी के, जहां हो थोडीसी जमी थोडा आसमां, जहां चाँद पोहोचे बिना इजाजत के, जहां हो मुसाफिर का ठिकाना, जहां आए जाने वाला पल पलट के, जहां दो दीवाने एक शेहर मे, जहां सजते है सपने सात रंग के, जहां पहचान होती है आवाज से, जहां अरमां हो पुरे दिल के, जहां सपनों में दिखे सपने, जहां रात हो ख़्वाबों की, जहां गले लागए झिंदगी, जहां ना हो कोई शिकवा झिंदगी से, जहां नाराज ना हो झिंदगी , जहां हैरान ना हो झिंदगी, इलाज करवाते हम वही से... जहां जख्म होते है दवाई के लिए दवाई-ऐ-गुलजार! #सशुश्रीके
वर्गीकरण
लेखनविषय:

2 टिप्पण्या 1,582 दृश्ये
शेअर करा: 📱 WhatsApp

Comments

महासंग्राम नवीन

तसं पाहिलं तर मिपा वर हिंदी कविता आली कि इथली मंडळी आक्षेप घेतात पण
गुलजार
वर लिहिलीत तेव्हा सौ खून माफ
इलाज करवाते हम वही से... जहा जख्म होते है दवाई के लिए
हे भारी झालं आहे.