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दवाई-ऐ-गुलजार!

लेखक अज्ञात यांनी गुरुवार, 17/03/2016 12:35 या दिवशी प्रकाशित केले.
Gulzar इलाज करवाते हम वही से... जहा जख्म होते है दवाई के लिए जहां पल गुजरे बिना घडी के, जहां हो थोडीसी जमी थोडा आसमां, जहां चाँद पोहोचे बिना इजाजत के, जहां हो मुसाफिर का ठिकाना, जहां आए जाने वाला पल पलट के, जहां दो दीवाने एक शेहर मे, जहां सजते है सपने सात रंग के, जहां पहचान होती है आवाज से, जहां अरमां हो पुरे दिल के, जहां सपनों में दिखे सपने, जहां रात हो ख़्वाबों की, जहां गले लागए झिंदगी, जहां ना हो कोई शिकवा झिंदगी से, जहां नाराज ना हो झिंदगी , जहां हैरान ना हो झिंदगी, इलाज करवाते हम वही से... जहां जख्म होते है दवाई के लिए दवाई-ऐ-गुलजार! #सशुश्रीके
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प्रतिक्रिया 2

प्रतिक्रिया

तसं पाहिलं तर मिपा वर हिंदी कविता आली कि इथली मंडळी आक्षेप घेतात पण
गुलजार
वर लिहिलीत तेव्हा सौ खून माफ
इलाज करवाते हम वही से... जहा जख्म होते है दवाई के लिए
हे भारी झालं आहे.