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मेरे हर लफ्ज मे छुपा हुआ तूफान है !

लेखक वडापाव यांनी मंगळवार, 06/11/2012 या दिवशी प्रकाशित केले.
मेरे हर लफ्ज मे छुपा हुआ तूफान है, खुदा भी अभी तक जिससे अन्जान है. मिटा दी है वक्त ने मासुमियत इस चेहरेसे, आँखे बताती है इरादा, क्या करु मैं, पहलेसे. दिल तो साहब साफ है, पर जिस्म बे-ईमान है मेरे हर लफ्ज मे छुपा हुआ तूफान है, काबिल को अपनी मंजिल पे लेजाने का जो राज है बेकार हम बैठे ह्ये, काम कर रहे अल्फाज है. दिमाग ये जागा है तब जब दिल हुआ बेजान है मेरे हर लफ्ज मे छुपा हुआ तूफान है, तू ही साहिल, तू ही मंजिल, तू ही है ये जिंदगी तू नही तो कुछ नही, ये जिंदगी है बेतुखी तेरे दीदार से समझता हु की मुझमे जान है मेरे हर लफ्ज मे छुपा हुआ तूफान है, हुस्न का ये रंग कभीसे मुझपे क्यु नाराज है ना तेरा साया दिखा है, ना सुनी आवाज है इंतजार मे तेरे बंदा हुआ हैरान है मेरे हर लफ्ज मे छुपा हुआ तूफान है, तेरे बिना ये जिंदगी मेरी हुयी सुमसान है, तू नही तो जिंदगी में बची कहा वो शान है मेरे हर लफ्ज मे अभीभी छुपा तूफान है उपरवाला खुदा भी अभी तक अंजान है ('काला बाजार' या देवानंदच्या चित्रपटातील 'अपनी तो हर आह इक तूफान है' या गाण्यामुळे प्रेरित होऊन)
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