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विश्वरूप तेज झाले | सर्व तेज येथ आले |

लेखक सागरलहरी यांनी सोमवार, 09/08/2010 या दिवशी प्रकाशित केले.
Mahalaxmi विश्वरूप तेज झाले | सर्व तेज येथ आले | जगज्जननीरूप बनले | महालक्ष्मी || रजत वर्ण प्रभावळ | त्यात शोभे मुख कमळ | सुवर्ण मुगुट उज्ज्वळ | दिव्य रूप || सुंदर नथ नासिकेसी | कंठी भूषणे ल्याली तैसी | प्रेमे पाहे भक्तासी | आदी-माया || सुवर्ण चरण सुंदर | मनोहर ल्याले नुपूर | पाहोनिया भक्तिपूर | मनी दाटे || सर्व विश्वाची आई | रक्त वर्ण वसन घेई | मातृ रूपे दर्शन देई | राम माझा || रूप मनोहर धरिले | परी गदा चक्र राखिले | वात्सल्याने भक्त पोशिले | सावळ्याने || विश्व ज्याचे छत्री राहे | छत्र घेउनी उभा आहे | ध्वज पताका सहित आहे | भक्त वत्सल || साजिरे ध्यान सकळ | भक्त स्मरे सर्वकाळ | ध्यान करीता कळीकाळ | दूर राहे || याहो याहो सर्व लोक | पहा याचे कौतुक | भक्त प्रेमा देई भातुक | आई बनुनी || राम आणि जगन्माता | एक-रूप की तत्वतां | दोन रूपे धरिती भक्ता | तोषवाया || -- सागर लहरी ०९-०८-२०१०
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