Skip to main content

काकमित्रा

काकमित्रा

Published on 29/01/2010 - 18:52 प्रकाशित मुखपृष्ठ
अंतीच्या कळान्चे | जिवाला लागीर | सोसेना उशीर | काही केल्या || भयकारी चित्र | दिसते सर्वत्र | घरदारा पुत्र | धूसरती || धुमस ही कंठी | नाही येत ओठी | राहिल्या त्या गोष्टी | सांगायच्या || सांगितल्याविण | समजावे मन | उतरावे ऋण | कसे आता || पिन्डाला वेढीन | गुज सुचवीन | मग घास देइन | काक मित्रा || - सागरलहरी
लेखनविषय:

याद्या 1057
प्रतिक्रिया 2

भयकारी चित्र | दिसते सर्वत्र | घरदारा पुत्र | धूसरती || हम्म!! कविता छान आहे. - प्राजक्ता http://www.praaju.com/

कविता हा माझा प्रांत नव्हे, पण ही कविता आवडली हं! ------------------------ सुधीर काळे Parkinson's Laws 1. Work expands to occupy time available. 2. Bureucrats add subordinates, not rivals. 3. In meetings, time spent on a point is inversely proprtional to its importance!