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येई येई गा मुकुंदा | जगज्जीवन परमानंदा |

येई येई गा मुकुंदा | जगज्जीवन परमानंदा |

Published on 26/12/2009 - 15:54 प्रकाशित मुखपृष्ठ
येई येई गा मुकुंदा | जगज्जीवन परमानंदा | आम्ही तुझ्या नामछंदा | वेडावलो || तुझिया मायेपासून राही | जगी ऐसे काही नाही | भक्त तुझा सावध पाही | माया मोहा || भवसागरी अफाट जळ | काम लोभाचे नित्य खेळ | तरण्या यातून द्यावे बळ | आम्हा लागी || हवेपणाची हाव तोडी | नकोपणाही तैसा सांडी | नाम किर्तना करुनी होडी | तरावया || नाम तुझे जपे मुख | सदा होय जिव्हे सुख | डोळीयाना होय दुःख | अपार की || जिव्हे तुजला मिळतो हरी | नामजपे या संगत करी | वंचित आहो आम्ही परी | दर्शनासी || घेत नाम देव राया | धरुनी संता तरेन माया | परि या नेत्रा सुखी कराया | दर्शन देई || - सागर लहरी २५.१२.२००९
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