जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे......
मेरे मेहबूब कयामत होगी....
आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी...
मे री न ज रे तो गि ला क र ती है....
तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी....
पुढचे अक्षर "ग"....
ना कजरे की धार, ना मोतियों के हार
ना कोई किया सिंगार, फिर भी कितनी सुंदर हो
मन में प्यार भरा, और तन में प्यार भरा
जीवन में प्यार भरा, तुम तो मेरे प्रियवर हो
ह घ्या.....
(अंताक्षरी प्रेमी)
अनिरुद्ध
ना बोले तुम न मैने कुछ कहा
लगन (अनंतवेळा म्हणून झाल्यावर
गोरी तेरी आखें कहे(लकी अली)
भुला नही देना जी
सावनकि घटा १९६६ ओपी नय्यर
हा ४५६ वा प्रतिसाद म्हणजे..
अंताक्षरी पुढे चालू...........