निओ-अद्वैती पसायदान
आता भासात्मके देवे। येणे वाग्यज्ञे कोपावे|
कोपोनी मज द्यावे। कसाबदान हे||
जे सुष्टांची वीरता सांडो। तया निराकारी रती वाढो|
दुष्टा अकस्मात जडो। प्रेम शांतीचे||
दुरिताचे जीवित जावो। विश्व अधर्म सूर्ये पाहो|
जो जे ढापील तो ते लाहो| प्राणिजात||
गर्जत विकल मंडळी| नश्वरनिष्ठांची मांदियाळी|
धडपडत भूमंडळी| भेटतू भूता||
करा हीनबुद्धीचे तांडव| वासनाविकृतींचा ठाव|
बोलती हे पुंगव| तर्कट्यांचे||
मानवास जे लांच्छन| मुखंड जे बुद्धिहीन|
ते सत्याचे सदा खंडन| करिते होतू||
किंबहुना सर्व सुखी| मत्त होवोनी तिन्ही लोकी|
त्याजिजो आदिपुरुषी| अखंडित||
आणि ग्रंथोपजीविये| विशेषी लोकी इये|
इष्टानिष्टनकळे| होआवेजी||
येथ म्हणे श्रीक्रौर्येश्वरावो| हा होईल दानपसावो|
येणे वरे हरिभक्त| दुखिया झाला||
(पुन:प्रकाशित)
(No subject)
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हम्म!!
ह्म्म...
ह्रूदयस्पर्शी
सुंदर