मला पुन्हा एकदा — विश्वेश, Mon, 01/11/2010 - 09:29 प्रतिक्रिया द्या 1252 वाचन 💬 प्रतिसाद (2) पुन्हा फ्रॅक्चर बंड्या Mon, 01/11/2010 - 11:14 नवीन पुन्हा धरायचा हट्ट कुत्राच्या पिल्लासाठी, आणि चोरायचे मावळे ... आपल्या किल्ल्यासाठी छान आहे कविता.. binarybandya™ मस्त शुचि गुरुवार, 03/25/2010 - 06:56 नवीन मस्त :) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जितनी दिल की गहराई हो उतना गहरा है प्याला, जितनी मन की मादकता हो उतनी मादक है हाला, जितनी उर की भावुकता हो उतना सुन्दर साकी है,जितना ही जो रसिक, उसे है उतनी रसमय मधुशाला।।
पुन्हा फ्रॅक्चर बंड्या Mon, 01/11/2010 - 11:14 नवीन पुन्हा धरायचा हट्ट कुत्राच्या पिल्लासाठी, आणि चोरायचे मावळे ... आपल्या किल्ल्यासाठी छान आहे कविता.. binarybandya™
मस्त शुचि गुरुवार, 03/25/2010 - 06:56 नवीन मस्त :) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जितनी दिल की गहराई हो उतना गहरा है प्याला, जितनी मन की मादकता हो उतनी मादक है हाला, जितनी उर की भावुकता हो उतना सुन्दर साकी है,जितना ही जो रसिक, उसे है उतनी रसमय मधुशाला।।
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