[घोडा] — अमृतांजन, Fri, 11/20/2009 - 19:15 प्रतिक्रिया द्या 1933 वाचन 💬 प्रतिसाद (3) बोले तो माधुरी दिक्षित Fri, 11/20/2009 - 19:29 नवीन बोले तो भाई भी कभी अछा ईन्सान था भाईच मनोगत आवडल हर एक अमृतांजन Fri, 11/20/2009 - 19:49 नवीन हर एक इन्सान पैदा होते ही एक सरीकाच रैता है; ये दुनिया उस्को स्पोऐल करतीये. आपको मेरा काव्य आवड्या और मै गहिवर्या. मैने अपने अमृतांजन Sat, 11/21/2009 - 10:34 नवीन मैने अपने पंटर-लोगको ये दिखाया की, खुद मादुरी दिक्षीत ने प्रतिसाद दियेला है अपुनके कविताको, तो सब्बीने पार्टी मांगी है. :-)
हर एक अमृतांजन Fri, 11/20/2009 - 19:49 नवीन हर एक इन्सान पैदा होते ही एक सरीकाच रैता है; ये दुनिया उस्को स्पोऐल करतीये. आपको मेरा काव्य आवड्या और मै गहिवर्या.
मैने अपने अमृतांजन Sat, 11/21/2009 - 10:34 नवीन मैने अपने पंटर-लोगको ये दिखाया की, खुद मादुरी दिक्षीत ने प्रतिसाद दियेला है अपुनके कविताको, तो सब्बीने पार्टी मांगी है. :-)
बोले तो
हर एक
मैने अपने