स्थळ : पाकिस्ताना-अफगाण सीमेवरील एक गाव. लष्करे-तोयबाची छावणी.
वेळ : कोणतीही, सकाळ दुपार संध्याकाळ
पात्रे : असेच दहा पंधरा अतिरेकी आजूबाजूला बसलेले.
तर, अतिरेकी असेच काहीतरी पुढचा प्लान करीत बसलेले असतात, त्याचा म्होरक्या त्यांना काहीतरी मार्गदर्शन करीत असतो. तेवढ्यात त्यांना दुरून त्यांना त्यांचा एक साथीदार पळत येताना दिसतो. साथीदार कसा त्या मॅराथॉन स्पर्धेत पळत असल्यासारखा जोरात पळत येतो. आणि धापा टाकत एके ठिकाण विसावतो.
म्होरक्या : क्यो बे, क्या हुआ ?
साथीदार : मालिक मालिक, (तो खूप दुरून पळत आला असल्याने धापा टाकत असतो, त्यामुळे एवढेच बोलू शकतो)
म्होरक्या : बोल क्या हुआ ?
साथीदार : मालिक मालिक......
म्होरक्या : बोल ना क्या हुं ?
साथीदार : गजब हो गया मालिक.
म्होरक्या : क्या हुआ रे, ओसामा पकड़ा गया क्या ?
साथीदार : नहीं मालिक.
म्होरक्या : फिर क्या हुआ ?
साथीदार : उससे भी बड़ा गजब हो गया.
म्होरक्या : क्या हुआ बतायेंगा के नहीं ?
साथीदार : बोहोत बड़ा गजब हो गया मालिक.
म्होरक्या : क्या हुआ वोह तो बता ना, आखिर मै क्या समजू, तेरा सीर ?
साथीदार : मालिक आजसे हिन्दुस्थान हमसे नहीं डरेगा...........
(आता तो म्होरक्या जरा गंभीर होतो)
म्होरक्या : क्यों रे , ऐसा क्या हुआ ?
साथीदार : मालिक बात ही कुछ ऐसी हुयी.
म्होरक्या : क्या बात हुयी ?
साथीदार : हिन्दुस्थान वासियों के दिलमे खौफ पैदा करने के लिए जो हमने बरसों मेहनत की है उसपे सब पानी फिर गया.
म्होरक्या : क्यों क्या हुआ ऐसा. किसने किया ?
साथीदार : आजसे हिन्दुस्थान में हमसे कोई भी नहीं डरेगा, एक मामूली बच्चा भी नहीं.
म्होरक्या : लेकिन क्यों, क्या हमारे धमाके वे हिन्दुस्थान वासी भूल गए. क्या हमें अभी फिरसे नया धमाके करने पड़ेंगे ?
साथीदार : नहीं मालिक, कुछ फायदा नहीं, हमसे एक नया ताकतवर शत्रु आ गया है.
म्होरक्या : कौन है वोह, जरा नाम तो बताओ. कांट के रख देंगे.
साथीदार : नहीं मालिक, वोह शत्रु बड़ा ही खतरनाक है. दीखता भी नहीं है. कहा पे रहता है, क्या करता है, कुछ पता नहीं. चुपके से अपना काम कर जाता है.
म्होरक्या : फिर तुम्हे कैसे पता चला ?
साथीदार : अजू हुजुर हमें क्या, हिंदुस्तान वासियोको भी पता नहीं था. वोह 'विकीलिक्स' नामके किसी वेब साईट ने उसका पोल खोल दिया उसकी वजह से ही हमें आज पता चला. और सुना है उस शत्रु को बड़े-बड़े नेता डरते है. उस शत्रु ने सारे हिन्दुस्थान वासियोके दिल में हमसे भी बड़ा खौफ पैदा कर दिया है.
म्होरक्या : कैसे पैदा कर सकते है खौफ, क्या उन्होंने कोई धमाके किये है, हमने तो नहीं सुना.
साथीदार : वोह तो मुजे भी नहीं पता, लेकिन अगर भारतकी सरकार भी अगर उनसे डरती है, तो सचमुच ही वे बसे चालक और खतरनाक होंगे.
म्होरक्या : तो फिर अब क्या ?
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सगळीकडे शांतता होते.
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तेवढ्यात TV वर बातम्या येतात.
विकिलीक्स से मिले कागाजादो ने अनुसार 'राहुल गाँधी ने बताया है की भारतको सबसे बड़ा खतरा लश्करे-तोयबा से नहीं, बल्कि हिन्दू-आतंकवादियोंसे है. इसलिए सबसे बड़ा खौफनाक का खिताब आजसे लश्करे तोयबासे वापिस लेकर हिन्दू आतंकियों को दीया जायेगा
म्होरक्या : नहीं..ऐसा नहीं हो सकता, जो बरसो की मेहनत हमने की है, उसपे ये कल के हिन्दू आतंकवादी पानी नहीं फेर सकते. कुछ तो करना होगा.
साथीदार : कुछ नहीं कर सकते
म्होरक्या : क्यों नहीं. अगर वे AK 47 इस्तेमाल करते है तो हम AK 57 इस्तेमाल करेंगे.
साथीदार : नहीं हुजुर वोह जिस हतियार का इस्तेमाल करते है, वोह हम नहीं कर सकते.
म्होरक्या : क्यों, वोह हतियार बड़ा महंगा है क्या ?
साथीदार : नहीं हुजुर ऐसी बात नहीं है, वोह हथिया बोहोत ही सस्ता और कहिभी आसानीसे मिलने वाला है.
म्होरक्या : तो फिर लेके आओ, हम उसे चलाके उनसे आगे बढ़ जायेंगे.
साथीदार : लेकिन हुजुर वोह हथियार चलाना हमें किसीने आज तक सिखाया नहीं. हम तो बस रायाफिल, बम जैसे मामूली हथियार ही चलन सिखाया गया है. उनका हथियार चलाने के लिए बोहोत मेहनत करनी पड़ती है, बोहोत ही सोच विचार करना पड़ता है, और हमें ये आता नहीं.
दुनियाके सबसे बड़े हथियार के वे आज मालिक है, और इसी लिए वे आज सबसे बड़े खतरनाक है. उस हथियार का नाम है कलम.
म्होरक्या निशब्द
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आई ग !! आवरा !!भांचोत त्या
दुरुस्ती
सहमत. अवांतरः डावखुरा हिंदू
लेखातील प्रामाणिक भावनांशी
सहमत
In reply to लेखातील प्रामाणिक भावनांशी by अवलिया
प्रत्येक हिंदूद्वेष्टा हा
In reply to लेखातील प्रामाणिक भावनांशी by अवलिया
+२
In reply to लेखातील प्रामाणिक भावनांशी by अवलिया
काळे साहेब
In reply to +२ by सुधीर काळे
लेखातील प्रामाणिक भावनांशी सहमत आहे.
मस्त रंगवलाय प्रयोग.
दुष्ट! हिंदुद्वेष्टे मेले !