अहेवपण ...

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विशाल कुलकर्णी's picture
विशाल कुलकर्णी in जे न देखे रवी...
14 Nov 2017 - 3:56 pm

कातरवेळी अस्वस्थ मनाला
दुरच्या दिव्यांची वाटे आस
स्तब्ध-निःशब्द सूर्यास्तवेळा
कितीक स्मरती हळवे भास

उगाच ओठी शब्द अडकती
दूर कोणी कोकिळ बोलतो
तुडुंब मनाचे आगर भरतां
उद्रेकाला मग वाट शोधतो

नाद खगांचे, स्वर समीराचा
कातळडोही अनाम खळबळ
विजनवास व्रतस्थ मनाचा
गर्द सावल्या सावळ सावळ

पैलतीरी उभे दुत प्रकाशी
कुणी छेडले सनईचे सूर
अहेवपण सजले सरणावर
प्रिया मनी हे कसले काहूर?

© विशाल कुलकर्णी

कविताकरुण

प्रतिक्रिया

पद्मावति's picture

14 Nov 2017 - 6:15 pm | पद्मावति

अतिशय सुरेख!

प्राची अश्विनी's picture

14 Nov 2017 - 7:06 pm | प्राची अश्विनी

+1

अत्रुप्त आत्मा's picture

15 Nov 2017 - 5:32 pm | अत्रुप्त आत्मा

+१ . येकच नंबर.

ज्ञानोबाचे पैजार's picture

15 Nov 2017 - 10:42 am | ज्ञानोबाचे पैजार

पैलतीरी उभे दुत प्रकाशी
कुणी छेडले सनईचे सूर
अहेवपण सजले सरणावर
प्रिया मनी हे कसले काहूर?

क्या बात.... काय लिहितोस... बेहद्द आवडले...

वाचताना आरती प्रभुंची "विश्रब्ध मनाच्या कातरवेळी" ही कविता आठवत होती.

त्या कवितेमधला "अहेवपण" असाच अस्वस्थ करुन गेला होता....

पैजारबुवा,

पैसा's picture

15 Nov 2017 - 11:12 am | पैसा

आह!!

जागु's picture

15 Nov 2017 - 11:20 am | जागु

सुंदर.

नाखु's picture

15 Nov 2017 - 1:05 pm | नाखु

निराश केलं नाहीस

जियो

हळवा प्रापंचिक नाखु

किसन शिंदे's picture

15 Nov 2017 - 1:35 pm | किसन शिंदे

सुरेख लिहिलंय !

अतिशय तरल कविता. यानिमित्ताने सूड यांची 'नवमी' ही कविता आठवली.

प्राची अश्विनी's picture

16 Nov 2017 - 6:15 pm | प्राची अश्विनी

बरोबर. मलाही ती आठवत होती पण नेमकं नाव ,कवी विसरले होते.

ए ए वाघमारे's picture

18 Nov 2017 - 9:57 am | ए ए वाघमारे

सुंदर

रातराणी's picture

22 Nov 2017 - 12:10 am | रातराणी

_/\_ विशालदा अप्रतिम आहे कविता!